वाराणसी में 40 विद्यालयों की मान्यता समाप्त, लॉकडाउन के चलते नवीनीकरण के लिए अब तक नहीं किया आवेदन

वाराणसी में 40 विद्यालयों की मान्यता समाप्त, लॉकडाउन के चलते नवीनीकरण के लिए अब तक नहीं किया आवेदन
Publish Date:Tue, 26 May 2020 05:00 AM (IST) Author: Saurabh Chakravarty

वाराणसी, जेएनएन। बेसिक शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त जनपद के करीब 40 विद्यालयों की मान्यता 31 मार्च को ही समाप्त हो गई। विभाग ने इन विद्यालयों को प्राइमरी व जूनियर कक्षाओं के संचालन के लिए तीन वर्षों के लिए अस्थायी मान्यता प्रदान की थी। 31 मार्च को तीन वर्ष की अवधि समाप्त हो जाने के बावजूद इन विद्यालयों ने अब तक नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है।

वहीं, पहली अप्रैल से नया सत्र शुरू हो गया है। बगैर नवीनीकरण के ही विद्यालयों ने नए सत्र में बच्चों का दाखिला भी ले लिया है। अब उन्हेंं नवीनीकरण की चिंता सता रही है। दरअसल, बेसिक शिक्षा विभाग नए विद्यालयों को पहले दो या तीन वर्ष के लिए अस्थायी मान्यता प्रदान करता है। तीन वर्ष बाद विद्यालयों को स्थायी मान्यता के लिए आवेदन करना होता है। वहीं, इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते 22 मार्च से ही पूरे देश में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया।

लॉकडाउन के चलते ऐसे विद्यालय नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं दे सके। अब लॉकडाउन-4 में लोगों को कार्यालयों में आने-जाने की छूट मिली है। घरों से बाहर निकलने की छूट मिलते ही निजी कॉन्वेंंट विद्यालयों के प्रबंधक बीएसए कार्यालय का चक्कर काटना शुरू कर दिए हैं। इस लॉकडाउन में दस विद्यालयों ने अस्थायी से स्थायी मान्यता के लिए आवेदन भी कर दिया है। इसमें उन्होंने लॉकडाउन का हवाला देते हुए 31 मार्च तक आवेदन न दे पाने के कारण का भी उल्लेख किया है।

एक वर्ष के बाद तीन वर्ष के भीतर संबंधित विद्यालय स्थायी मान्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं

अंग्रेजी व हिंदी दोनों माध्यमों के विद्यालयों को शुरू में तीन वर्षों के लिए विभाग अस्थायी मान्यता प्रदान करता है। एक वर्ष के बाद तीन वर्ष के भीतर संबंधित विद्यालय स्थायी मान्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं, इस वर्ष जिन विद्यालयों की अस्थायी मान्यता की अवधि 31 मार्च को समाप्त हो रही थी। लॉकडाउन को देखते हुए उनके आवेदन अब भी स्वीकार कर लिए जा रहे हैं। नवीनीकरण कराने के लिए आवेदन करने वाले विद्यालयों को ही सशर्त वर्तमान सत्र में पठन-पाठन संचालित करने की अनुमति होगी।

-राकेश सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।

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