वाराणसी के वरुणापार इलाके में सीवर लाइन से नहीं जुड़े 25 हजार शौचालय, गंगा में जा रहा मलजल

वरुणापार इलाके 25 हजार शौचालय अब तक सीवर लाइन से नहीं जुड़े हैं।

गंगा निर्मलीकरण का सच जानेंगे तो आश्चर्य से भर जाएंगे। वरुणापार इलाके 25 हजार शौचालय अब तक सीवर लाइन से नहीं जुड़े हैं। इनकी गंदगी गलियों व कालोनियों में विकासित की गई भूमिगत जल निकासी के माध्यम से नालों में जाते हैं जहां से वरुणा व गंगा में गिरते हैं।

Saurabh ChakravartyThu, 18 Feb 2021 06:30 AM (IST)

वाराणसी, जेएनएन। गंगा निर्मलीकरण का सच जानेंगे तो आश्चर्य से भर जाएंगे। सिर्फ वरुणापार इलाके 25 हजार शौचालय अब तक सीवर लाइन से नहीं जुड़े हैं। इनकी गंदगी गलियों व कालोनियों में विकासित की गई भूमिगत जल निकासी के माध्यम से नालों में जाते हैं जहां से वरुणा व गंगा में गिरते हैं।

सरकार ने करोड़ों रुपये नमामि गंगे के तहत आवंटित किए हैं। इसके बाद भी विभागीय धांधली ऐसी कि प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर गंगा मैली हो रही हैं। केंद्र सरकार ने वरुणापार इलाके में 105 करोड़ रुपये से नई सीवेज लाइन में घरों के शौचालयों को जोडऩे के लिए दिए थे। इसमें 50 हजार दो 52 घरों के शौचालयों का कनेक्शन सीवर लाइन से करना था। अब तक 26 हजार चार सौ घरों का कनेक्शन ही हो पाया। शेष करीब 25 हजार शौचालयों के कनेक्शन का काम ढाई वर्ष से अटका है। संबंधित विभाग जल निगम की गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अफसरों से जानकारी ली जाती है तो बजट नहीं होने का रोना रोते हैं। शौचालयों का कनेक्शन नहीं होने से गोइठहां में बना एसटीपी भी पूरी क्षमता से नहीं चलता है। इस एसटीपी की क्षमता 120 एमएलडी है लेकिन प्लांट तक औसतन 35 एमएलडी की मलजल पहुंच रहा है। इसकी वजह सीवर लाइन में शौचालयों का कनेक्शन नहीं होना है। सीवेज सिस्टम से नहीं जुड़े शौचालय सोख्ता पिट, भूमिगत जल निकासी व नालों से जुड़े हैं। सोख्ता पिट भूमिगत जल स्रोत को दूषित कर रहा है। गंगा का जल स्तर भी भूमिगत जल स्रोत से जुड़ा है। ऐसे में अप्रत्यक्ष रूप से गंगा ही मैली हो रही हैं।

वर्ष 2010 में आया जेएनएनयूआरएम

जेएनएनयूआरएम के तहत वरुणापार इलाके 50 हजार घरों के लिए सीवेज सिस्टम तैयार करने का प्रस्ताव बना जिसे ट्रांस वरुणा सीवेज सिस्टम नाम दिया गया। यह कार्य स्वीकृति के दो साल बाद यानी 2010 में प्रारंभ हुआ लेकिन जमीन की उपलब्धता समेत विभिन्न स्थानीय रुकावटों की वजह से पूरा होने में करीब नौ साल लग गए। देखें तो अब भी परियोजना पूर्ण नहीं हो सकी।

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी यह हाल

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वरुणा नदी के जल को निर्मल करने के लिए आदेशित किया है जिसकी अवहेलना की जा रही है। नालों में बहती शौचालयों की गंदगी वरुणा नदी को दूषित कर रही है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण नदी का बजबजता पानी है जिसमें तेज दुर्गंध उठती है।

बजट आते ही कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा

वरुणापार इलाके में नई सीवर लाइन से घरों के शौचालयों का कनेक्शन करने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। बजट आते ही कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

- एके पुरवार, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई

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