एआरटीओ कार्यालय में बिचौलिए और लिपिक के बीच तनातनी

एआरटीओ कार्यालय में बिचौलिए और लिपिक के बीच तनातनी

जागरण संवाददाता उन्नाव तमाम प्रयासों के बाद भी न तो ओवरलोडिग रुक पा रही है और न ही एअ

Publish Date:Thu, 26 Nov 2020 07:55 PM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, उन्नाव : तमाम प्रयासों के बाद भी न तो ओवरलोडिग रुक पा रही है और न ही एआरटीओ कार्यालय में फैला बिचौलियों का साम्राज्य ही समाप्त हो सका है। अधिकांश काम बिचौलियों से होकर ही विभाग के लिपिकों तक पहुंच रहे हैं। इससे वाहन स्वामियों को आर्थिक चोट का सामना करना पड़ रहा है। गुरुवार को एक बिचौलिए और लिपिक में जमकर गाली गलौज हुआ। लिपिक का आरोप है कि बिचौलिया दबाव बनाकर काम करना चाह रहा था। जबकि, बिचौलिए का आरोप है कि लिपिक पैसा लेकर भी कई दिनों से वाहन स्वामी को टरका रहा था। बवाल बढ़ने और एक दूसरे को देख लेने की धमकी मिलने पर एआरटीओ ने पुलिस बुलाने के लिए फोन करने को कहा तो बिचौलिया ही नहीं कार्यालय के सामने स्थित बिचौलियों के कार्यालय व दुकानों भी बंद हो गई।

एआरटीओ कार्यालय के लिपिक पवन त्रिपाठी का आरोप है कि शहर का एक बिचौलिया कार्यालय में सक्रिय है। उसने अपना एक गिरोह बना रखा है। एक हिदू संगठन के नेता का उसे संरक्षण प्राप्त है। सत्ता पक्ष के विधायक के नाम का दबाव बनाकर वह कार्यालय में लाइसेंस व अन्य कार्य कराने के लिए उस पर अन्य कर्मचारियों पर दबाव बनाता है। एक सप्ताह से वह गलत तरीके से दबाव बना रहा था। विरोध करने पर बुधवार 25 नवंबर को उसके पक्ष से हिदू संगठन के नेता कई लड़कों के साथ कार्यालय पहुंचे और सत्ता में पैठ की बात कह देख लेने की धमकी दी। गुरुवार को भी बिचौलिए ने साथियों के साथ मिलकर काम कराने का दबाव बनाने की कोशिश की। जिस पर तनातनी हो गई। बिचौलिए की ओर से गाली-गलौज व व देख लेने तक की धमकी भी दी गई। एआरटीओ अनिल कुमार त्रिपाठी ने बताया कि कार्यालय में बिचौलियों के दखल को खत्म करने के लिए कई बार एसपी को प्रार्थना पत्र दिया गया। इस प्रकरण के बाद फिर से एसपी को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया है। गेट पर तैनात होमगार्डों को भी निर्देश दिए गए हैं कि किसी बिचौलियों को कार्यालय में घुसने न दिया जाए। कोई दबाव बनाए तो वह जानकारी दें। वहीं दूसरी तरफ जिन लोगों से विवाद हुआ उनका कहना था कि कई दिनों से लिपिक पैसा मांग रहा था जिसकी शिकायत की तो वह गाली गलौज करने लगा।

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