खेतों में भरे पानी ने डूबो दिए किसानों के अच्छे उत्पादन का अरमान

खेतों में भरे पानी ने डूबो दिए किसानों के अच्छे उत्पादन का अरमान
Publish Date:Thu, 24 Sep 2020 11:21 PM (IST) Author: Jagran

सुलतानपुर : किसानों के अरमानों पर एक बार फिर प्रकृति ने पानी फेर दिया। मानसून की शुरुआत जून, जुलाई व अगस्त में अच्छी से बारिश हुई तो धान की फसल तैयार हो गई। सितंबर माह में किसान धान की अंतिम सिचाई के लिए मध्यम वर्षा की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन चार दिनों से लगातार हो रही तेज बरसात व हवाओं ने अच्छे उत्पादन की उम्मीद ही खत्म कर दिया है।

जिले में बीते सोमवार से ही बरसात का क्रम शुरू हुआ। किसानों ने सोचा कि यह बरसात फसलों को संजीवनी देगी, लेकिन मंगलवार को चली तेज हवाओं ने फसलों जमीन में गिरा दिया। तो वहीं बारिश भी थमने का नाम नहीं ले रही है। किसान के माथे पर चिता की लकीरें खिच गई। वहीं बुधवार की रात से गुरुवार की दोपहर तक तो बारिश का क्रम ही नहीं टूटा है। किसानों की जो बची उम्मीद थी वह भी टूट गई।

उपज आधी रह जाने की आशंका : बारिश का कहर जारी रहा तो धान की उपज आधी रह जाने की आशंका है। फसल की वही प्रजातियां बच सकेगी जो देरी से रोपी गई है और जिनकी बढ़त अभी बहुत कम है। भदैंया ब्लाक के बालमपुर निवासी प्रगतिशील कृषक भोला सिंह ने बताया कि पूरे सीवान में अधिकतर धान की फसल जमीदोज हो गई है। व्यवहारिकता यह है कि गिरी फसलें पानी में पानी में पड़ी रहने से तीन दिन के भीतर सड़ जाती है। वहीं खरीफ की अन्य फसलों अरहर और तिल को भी बरसात से भारी नुकसान हुआ है।

वैज्ञानिकों ने कहा उम्मीद न छोड़े किसान : आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज के मृदा विज्ञान विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ आरआर सिंह ने कहा कि भारी वर्षा के बावजूद समतल और जल निकासी की सुविधा वाले खेतों में पानी का जमाव कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा और फसल को पनपने की स्थितियां बन जाएगी। ऐसे में देशी प्रजाति का धान रोपने वाले किसानों को नुकसान की आशंका कम है। उन्होंने कहा कि किसान खेतों से जल निकासी की व्यवस्था करते रहें।

तापमान में भी आई गिरावट : लगातार हो रही बरसात से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। जिले में अधिकतम तापमान 29 डिग्री व न्यूनतम 24 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।

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छतों से टपक रहा पानी, कर्मी परेशान

कादीपुर : तीन दिनों से लगातार बारिश होने के चलते तहसील स्थित पूर्ति कार्यालय के जर्जर भवन की छतों से पानी टपक रहा है। हालात यह हो गए हैं जरूरी कागजात भी पानी में भीग रहे हैं।

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