यूनीफार्म की रकम से खरीद रहे डीएपी व बीज

जिले के 2195 विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं को स्कूल बैग यूनिफार्म जूता-मोजा व स्वेटर के लिए 1100 रुपये डीबीटी के माध्यम से भेजा जा रहा है।

JagranMon, 29 Nov 2021 01:01 AM (IST)
यूनीफार्म की रकम से खरीद रहे डीएपी व बीज

सुलतानपुर : परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को यूनिफार्म, जूता-मोजा, बैग व स्वेटर खरीदने के लिए खाते में भेजी जाने वाली प्रति छात्र 1,100 रुपये की धनराशि से अभिभावक डीएपी, बीज खरीद रहे हैं।

सच्चाई यह है कि अभिभावकों के खाते में भेजी गई रकम की तुलना में बच्चों के लिए अभी तक स्वेटर, यूनिफार्म, जूता-मोजा नहीं दिलाया जा सका है। इससे छात्र ठंड में बिना स्वेटर या फिर पिछले साल मिले गर्म कपड़ों को पहनकर विद्यालय जाने को मजबूर हो रहे हैं।

जिले के 2,195 विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा एक से आठ तक के छात्र-छात्राओं को स्कूल बैग, यूनिफार्म, जूता-मोजा व स्वेटर के लिए 1100 रुपये डीबीटी के माध्यम से भेजा जा रहा है। धनराशि ट्रांसफर करने की गति इतनी धीमी है कि अभी भी 30 फीसद से अधिक अभिभावकों के खाते में अभी भी धनराशि नहीं भेजी जा सकी है।

पड़ताल में हकीकत आई सामने : दैनिक जागरण की टीम ने शासन से सीधे खाते में भेजे गए रुपयों के उपयोग की हकीकत परखी तो सच्चाई चौकाने वाली सामने आई। दूबेपुर विकास खंड के एक जूनियर विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के 120, एक प्राइमरी विद्यालय के 101 व एक अन्य जूनियर विद्यालय के 168 अभिभावकों के खातों में रकम भेजी जा चुकी है। जानकारी ली गई तो पाया गया कि इसमें से 30 फीसद अभिभावकों द्वारा बच्चों के लिए किसी सामान की खरीदारी नहीं की गई। अखंडनगर शिक्षा क्षेत्र के एक अभिभावक ने खाते से रुपयों को निकालकर खाद व बीज खरीदने की बात स्वीकार की। कुड़वार विकास खंड में भी काफी संख्या में अभिभावकों ने खाते से धनराशि तो निकाल ली, लेकिन उसका उपयोग बच्चों के हित में नहीं किया गया। कुछ ने कहा कि पिछले साल का स्वेटर प्रयोग में लाया जाएगा। यह दलील दी गई कि जितने रुपये दिए गए हैं, उतने में सामानों को खरीदना संभव नहीं है।

जिम्मेदार के बोल

भ्रष्टाचार को रोकने के लिए शासन की तरफ से अभिभावकों के खाते में सीधे रुपये भेजे जा रहे हैं। अब अगर इसका दुरुपयोग किया जा रहा तो ऐसे अभिभावकों की पहचान कर उन्हें बच्चों के लिए स्वेटर आदि खरीदने के लिए विवश किया जाएगा।

उपेंद्र सिंह, जिला समन्वयक

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