12 हजार हेक्टेयर बढ़ा इस बार धान की खेती का रकबा

इस बार बेहतर मानसून की उम्मीद में खरीफ की मुख्य फसल धान की बोआई के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी की गई है। इसके आच्छादन का लक्ष्य 42129 हजार हेक्टेयर तय किया गया है। यह बीते वर्ष की तुलना में 12 हजार हेक्टेयर अधिक है।

JagranSat, 19 Jun 2021 09:57 PM (IST)
12 हजार हेक्टेयर बढ़ा इस बार धान की खेती का रकबा

जागरण संवाददाता, सोनभद्र : इस बार बेहतर मानसून की उम्मीद में खरीफ की मुख्य फसल धान की बोआई के क्षेत्रफल में बढ़ोतरी की गई है। इसके आच्छादन का लक्ष्य 42,129 हजार हेक्टेयर तय किया गया है। यह बीते वर्ष की तुलना में 12 हजार हेक्टेयर अधिक है। पिछले वर्ष 30 हजार हेक्टेयर में धान के खेती का लक्ष्य था। वर्षा पर आधारित यह खेती जिले के तकरीबन सभी क्षेत्रों में परंपरागत रूप में होती है। कृषि विभाग की तरफ से अन्नदाताओं को राजकीय गोदामों से बीज उपलब्ध करा रहा है।

जनपद में इस बार 94,551 हेक्टेयर में खरीफ फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। खरीफ में मुख्य रूप से जिले में 90 फीसद धान की खेती होती हैं। इस बार खरीफ की फसलों के आच्छादित करने को खरीफ के फसलों का रकबा बढ़ाया गया है। कुल खरीफ की फसल लक्ष्य में 42,129 हेक्टेयर में धान की फसल का लक्ष्य है। शेष में मक्का, ज्वार, बाजरा, अन्य मोटा अनाज, मूंगफली, अरहर, उर्द व तिल है। धान की फसल के उत्पादन का लक्ष्य एक लाख तीन हजार, 91 एमटी और उत्पादकता 30.21 क्विटल प्रति हेक्टेयर है। किसानों की रुझान को देखते हुए इस बार लक्ष्य अधिक हो गया है। पिछले खरीफ सीजन में 95 हजार हेक्टेयर में उत्पादन और 29.44 क्विटल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता का लक्ष्य था। खरीफ फसल के लिए मौसम भी किसानों का साथ दे रहा है। किसान भी खेतीबाड़ी में लग गए है। धान की नर्सरी डालना शुरू कर दिए है। जिले में कई दिनों से हो रही रुक रुक बारिश से जहां जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। वहीं किसानों के लिए यह बारिश वरदान साबित हो रही है। बीज भंडारों पर 665 क्विटल धान उपलब्ध

किसानों की सुविधा के सरकार ने 50 फीसद अनुदान पर धान के बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराई है। सभी राजकीय बीज भंडारों पर आधार कार्ड और रकबा के अनुसार अभी भी बीज उपलब्ध है। इस बार 665 क्विटल धान के बीज की उपलब्धता सुनिश्चित कराई गई है।

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यूरिया का लक्ष्य भी हुआ दोगुना

मानसून को देखते हुए धान का रकबा बढ़ा दिया गया है। इसके बाद प्रशासन की तरफ से यूरिया के लक्ष्य को भी दोगुना कर दिया गया है। पिछले वर्ष 16 हजार मीट्रिक टन यूरिया का लक्ष्य जिले में था। इसको बढ़ाकर इस बार 32 हजार एमटी कर दिया गया है।

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बेहतर मानसून को देखते हुए इस बार धान के खेती का रकबा बढ़ाया गया है। धान का क्षेत्रफल बढ़ने के चलते यूरिया का लक्ष्य भी दोगुना हुआ है। धान की फसल के लिए जिले में उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता है। सहकारी समितियों और निजी पंजीकृत दुकानों पर बोरे पर अंकित मूल्य के अनुसार ही ई-पास मशीन से निकली पर्ची के अनुसार ही भुगतान करें। खरीद के बाद रसीद लेना नहीं भूलेंगे।

- पीयूष राय, जिला कृषि अधिकारी।

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