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अर्थव्यवस्था की मजबूती को अन्नदाताओं ने दिया साथ

जागरण संवाददाता, सोनभद्र : कोरोना के दौर में जहां कारोबार ठप हुए वहीं बेरोजगारी की दर भी जमीन पर आ गिरी है। ऐसे में अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। इस हालात में भी किसानों ने एक बार फिर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। किसानों ने जिला सहकारी बैंक में 75 करोड़ रुपये ऋण में 46 करोड़ जमा करके यह साबित किया है। यह उन विभागों के लिए एक उदाहरण है जिनके यहां कई सालों का कई करोड़ रुपये बकाया है।

मौसम की मार और देश-दुनिया को अन्न मुहैया कराने का जिम्मा लिए किसान हर परिस्थिति में साथ खड़ा होता है। ऐसे में जनपद के करीब 17 हजार से अधिक किसानों ने 62 साधन सहकारी समितियों के जरिए जिला सहकारी बैंक से 62 करोड़ 27 लाख रुपये का ऋण लिया था। बकाया जमा करने का समय 30 जून था। मार्च में ही लॉकडाउन लगा तो सहकारिता विभाग भी मान लिया कि इस वर्ष बकाया जमा हो पाना मुश्किल है, लेकिन किसानों ने 45 करोड़ 78 लाख रुपये यानी कुल बकाये का 73.52 फीसद धनराशि जमा कर दिया। गत वर्ष यही वसूली 71.35 फीसद थी। यानी इस वर्ष 3.17 फीसद ज्यादा वसूली हुई।

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समय पर बकाया जमा करने पर लाभ

साधन सहकारी समितियों के माध्यम से किसान कृषि ऋण लेते हैं। यहां तीन फीसद वार्षिक ब्याज दर पर यह ऋण समितियों में पंजीकृत किसानों को मिल जाता है। जो ऋण नहीं लेते उन्हें उधार की खाद भी मिल जाती है। एक अप्रैल को बकाया की गणना होती है और 30 जून तक जमा करना होता है। इस अवधि के बाद जमा करने पर सात फीसद का ब्याज देना पड़ता है। बोले अधिकारी..

वाकई किसानों को ऐसे ही नहीं अन्नदाता कहा जाता। इस वर्ष उम्मीद नहीं थी कि ऋण बकाया का इतना जमा हो पाएगा। गत वर्ष की तुलना में 3.17 फीसद ज्यादा किसानों ने बकाया जमा किया है। इससे अर्थव्यवस्था को सुचारू रखने में मदद मिलेगी।

- त्रिभुवन नारायण सिंह, एआर-सहकारिता

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