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कंटीले तार व करेंट से नहीं भाग रहे हाथी

जागरण संवाददाता, बभनी (सोनभद्र) : छत्तीसगढ़ के जंगलों से लगे बभनी थाना क्षेत्र के गांवों में हाथियों का उत्पात अब भी जारी है। वन विभाग ग्रामीणों को इस आतंक से बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा लेकिन, छत्तीसगढ़ सीमा से हाथी पुन: वापस लौट रहे हैं। इसकी मुख्य वजह छत्तीसगढ़ में यूपी सीमा पर कटीलें तार व उसमें बैट्री से प्रवाहित करेंट है। इसका खामियाजा बभनी क्षेत्र के ग्रामीणों को जान देकर उठाना पड़ रहा है।

छत्तीसगढ़ सीमा पर स्थित बभनी ब्लाक के गांवों डुमरहर, शीशटोला, नवाटोला, मगरमाड़, रम्पाकुरर के ग्रामीणों ने बताया कि छत्तीसगढ़ सीमा में जंगली क्षेत्र होने के कारण वहा आए दिन हाथियों का झुंड आता जाता रहता है। फसल व मकान आदि क्षतिग्रस्त होने पर तत्काल मुआवजा भी ग्रामीणों को मिलता है। इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ वन विभाग ने हाथियों के उत्पात से ग्रामीणों को बचाने के लिए कदम भी उठाया है। छत्तीसगढ़ में यूपी की सीमा पर कई स्थानों पर जंगलों में कटीले तार की बैरिकेडिंग कर दी गई है। तारों में बैट्री से करेंट भी प्रवाहित कर दिया जाता है। हाथियों का झुंड जैसे ही उस ओर रुख करता है करेंट के झटके से पुन: यूपी की सीमा में लौट आता है। यहीं वजह है कि छतीसगढ़ की सीमा से सटे यूपी के आधा दर्जन गांवों में हाथियों का उत्पात बदस्तूर जारी है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि बुधवार की रात वन विभाग के सारे तरकीबों को धता बताते हुए हाथियों का झुंड नवाटोला में छोटेलाल, चैन प्रताप व अरुण कुमार के धान की फसल को चौपट कर दिया। गनीमत था कि कोई मकान आदि नहीं गिराया। यह भी बताया कि दर्जनों की संख्या में हाथियों का झुंड दिन में जंगल में रहता है। शाम ढलते ही गांव की आबादी की तरफ हाथियों का झुंड चला आता है। अब तक लगभग 50 से ऊपर किसानों का फसलों को हाथियों के झुंड ने बर्बाद कर दिया है। राजेंद्र गोड़ के मौत के बाद भी हाथी वापस नहीं हुए हैं। यह भी कहा कि विगत वर्षों में भी हाथियों का झुंड आता रहा है लेकिन दो चार दिनों में ही वापस हो जाता था लेकिन वर्तमान समय में लगभग 20 दिनों से छतीसगढ़ व यूपी के मध्य जंगल में डेरा डाले हुए है। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए उठाया कदम

छत्तीसगढ़ राज्य के रघुनाथ नगर परिक्षेत्र के वन दारोगा हरिश्चंद्र यादव ने बताया कि सीमा पर केसारी, गिरवानी में तार से बैरिकेडिग की गई है। कम पावर की बैट्री से तारों में करेंट प्रवाहित किया जाता है, जिससे हाथियों का झुंड गांव में न आ सके। इससे ग्रामीण सुरक्षित हैं। यदि यूपी में हाथियों का उत्पात जारी है तो वहां के वन विभाग को भी इसी तरह का कदम उठाना चाहिए।

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