बच्चों के अभिभावकों को सरकार से आस

जागरण संवाददाता ओबरा (सोनभद्र) अनुवांशिक कारणों से होने वाली एक दुर्लभ बीमारी से ग्रसित

JagranMon, 29 Nov 2021 04:36 PM (IST)
बच्चों के अभिभावकों को सरकार से आस

जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र) : अनुवांशिक कारणों से होने वाली एक दुर्लभ बीमारी से ग्रसित ओबरा के पांच मरीजों में एक किशोर की दो दिन पूर्व हुई मौत के बाद अन्य अभिभावकों में चिता बढ़ गई है। किसी अभिभावक को यह पता हो कि उनके बच्चे की मौत नजदीक है तो उन पर क्या गुजरती होगी इसे शब्दों में बयां नही किया जा सकता है।

नगर के अब चार बच्चे ड्यूकेन मस्क्यूलर डिस्ट्राफी (डीएमडी) नामक गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। देश में इस गंभीर बीमारी का इलाज नही होता है। इस बीमारी की दवा दो से तीन करोड़ रुपये में सिर्फ अमेरिका में ही मिलती है, वह भी एक वर्ष के लिए ही। इस स्थिति में किसी अभिभावक के लिए इलाज कराना संभव नही हो पा रहा है। पिछले दिनों कोल इंडिया द्वारा साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में कार्यरत ओवरमैन सतीश कुमार रवि की बेटी सृष्टि रानी को हुए स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी नामक बीमारी के इलाज के लिए 16 करोड़ की राशि स्वीकृत करने की घोषणा के बाद ओबरा के अभिभावकों में भी कुछ आस बंधी है कि कोल इंडिया खर्च दे सकती है तो सरकार भी शायद सोचे। अभिभावकों के अनुसार सरकारी तौर पर मिली यह सहायता साबित करती है कि सरकार चाहें तो हमारे बच्चों का भी इलाज हो सकता है। अभिभावकों ने पत्र लिखकर देश के प्रधानमंत्री से इलाज की गुहार लगाई है। इस गंभीर बीमारी की चपेट में नगर के दो भाई आयुष (14) और हर्ष (10) तथा दो भाई विकास कुमार (17) व बृजेश कुमार (13) एवं आदित्य कुमार (10) शामिल हैं। इनमें विकास (17) की ही दो दिनों पूर्व मौत हो गई। परिजन बच्चों के इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई आदि महानगरों का चक्कर काटकर थक चुके हैं। एक अभिभावक मनोज कुमार का कहना है कि तमाम जगहों पर दौड़ लगा चुके लेकिन कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। जेनेटिक डिसआर्डर है इस

बीमारी का कारण

यह बीमारी मांसपेशियों की मदद से डिस्ट्राफिन के जरिए शरीर के फेफड़े, दिल तथा दिमाग पर गहरा असर डालती है। इसका लक्षण दो से पांच वर्ष की अवधि के भीतर दिखाई देने लगता है। 15 से 30 वर्ष की अवधि तक यह बीमारी चलती रहती है। इस बीमारी के गंभीर रूप से हो जाने पर पीड़ित के हाथ, पैर बिल्कुल काम नहीं करते, यहां तक पीड़ित अपने शरीर से मक्खी तक हटा नहीं पाता है। यह बीमारी लड़कों में ही होती है।

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