जल संरक्षण की देश में सबसे अधिक जरूरत : मेधा पाटकर

देश में सबसे अधिक जल संरक्षण की जरूरत है। नदियों व

JagranMon, 20 Sep 2021 11:01 PM (IST)
जल संरक्षण की देश में सबसे अधिक जरूरत : मेधा पाटकर

सीतापुर : देश में सबसे अधिक जल संरक्षण की जरूरत है। नदियों व तालाबों को संरक्षित करना होगा। नदी को माता कहने से काम नहीं चलेगा, जल स्त्रोतों को बचाने के लिए गंभीर प्रयासों की जरूरत है। यह बात नर्मदा बचाओ आंदोलन की सूत्रधार एवं जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की प्रमुख मेधा पाटकर ने एल्पिस ग्लोबल स्कूल में पर्यावरण, जल संरक्षण को लेकर संवाद कार्यक्रम में कही।

उन्होंने कहा रेत पानी को पकड़ कर रखता है। रेत नहीं होगी तो नदियां विलुप्त हो जाएंगी। अवैध रेत खनन के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है। नदियों में अवैध खनन से तमाम छोटी नदियां, जो वर्ष भर प्रवाहित होती थी, आज मृत प्राय हो गई हैं। बाढ़ का दोष नदी का नहीं, हमारा है। प्राकृतिक चीजों को बिना छेड़े काम हो। प्रकृति से खिलवाड़ कर विकास संभव नहीं। फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त दूषित जल नदियों व पर्यावरण का नुकसान कर रहा है। पीने युक्त जल भी दूषित हो रहा है। पर्यावरण, जल संरक्षण पर संवाद। नदियों में खनन के खिलाफ बुलंद करें आवाज, राष्ट्रीय स्तर पर छोटी-बड़ी नदियों को आपस में जोड़ने की जरूरत बताई।

पर्यावरणविद व अमेठी जल बिरादरी के प्रमुख डा. अर्जुन पांडेय ने कहा 40 वर्ष भूगोल पढ़ाया, जब अमेठी का भूगोल लिखने बैठा तो लिख नहीं पाया। अगर भूगोल बनाना है तो उसको सीखना पड़ेगा। हमें छोटी नदियों के संरक्षण पर जोर देना होगा। नदियों को राष्ट्रीय स्तर पर आपस में जोड़ने की जरूरत है जिससे छोटी, बड़ी नदियों में पूरे वर्ष भर जल रहे। अरुंधती राय, ऋचा सिंह, मोहित जायसवाल, आराध्य शुक्ला, मुदित सिघल, साकेत मिश्रा, रेनू मेहरोत्रा, अभिषेक अग्रवाल, अफजाल कौसर, देवी शंकर वाजपेयी, डा. अनुभव पांडेय आदि मौजूद रहे।

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