जीवन दायिनी के इंतजार में थमीं सांसें, मरीज-तीमारदार भगवान भरोसे

सरकारी रार में रोगियों का घुट रहा दम नहीं मिल रही एंबुलेंस

JagranThu, 29 Jul 2021 12:26 AM (IST)
'जीवन दायिनी' के इंतजार में थमीं सांसें, मरीज-तीमारदार भगवान भरोसे

सीतापुर : इमलिया सुल्तानपुर क्षेत्र के कुरका गांव की उर्मिला की रात में तबीयत बिगड़ गई। घर वालों ने हेल्प लाइन पर फोन किया तो जल्द एंबुलेंस पहुंचने का भरोसा मिला, पर घंटा भर बीत गया एंबुलेंस नहीं आई। उर्मिला की हालत अधिक बिगड़ती देख घर वाले पड़ोस के गांव जाकर आटो चालक नसीम के हाथ-पैर जोड़े तो वह उर्मिला को जिला अस्पताल लाने को तैयार हुआ। जिला अस्पताल पहुंचते-पहुंचते महिला की मौत हो गई। इसी तरह कई अन्य रोगी भी घंटों तक एंबुलेंस का इंतजार करने के बाद अन्य साधनों से अस्पताल पहुंचे। एंबुलेंस कर्मियों के कार्य बहिष्कार का बुधवार को तीसरा दिन भी बीत गया है। जिम्मेदारों के बीच इनका फैसला नहीं हो पाया है। एंबुलेंस कर्मियों व सिस्टम के बीच की रार में रोगियों के लिए उनकी जिदगी दांव पर है।

काल रिसीव कर दिया भरोसा, नहीं आई एंबुलेंस

मंगलवार शाम 5.59 बजे दैनिक जागरण प्रतिनिधि ने 102 काल कर एंबुलेंस की मांग की। हेल्प लाइन कर्मी ने पता पूछा, सीएचसी पूछी फिर कहा, चिता मत करो अभी एंबुलेंस पहुंच रही है लेकिन, 24 घंटे बीत गए न एंबुलेंस आई और न कोई पूछताछ हुई। बुधवार को यही बात जिला अस्पताल में एलिया के विशंभर दोहरा रहे थे। बताया, उन्होंने भी मंगलवार को 108 पर काल की थी। कहा गया एंबुलेंस पहुंच रही है, पर नहीं आई तो आज वह ई-रिक्शा से बीमार बेटे को अस्पताल लाए हैं।

एंबुलेंस नहीं मिली तो ढेलिया से ही बेटी को लाया अस्पताल

गजोधर बेटी को जिला अस्पताल लाने को सुबह हेल्प लाइन 108 पर काल की। बताया गया थोड़ी देर में एंबुलेंस पहुंच जाएगी। 11 बजे तक एंबुलेंस नहीं आई तो इंतजार तोड़कर गजोधर बेटी प्रीती को ढेलिया से ही अस्पताल ले आया। ढेलिया पर प्रीती, उसका पति और मां रामदेवी सवार थीं। गजोधर ने बताया, वह खैराबाद के ककरहिया गांव का है। शहर से उसका गांव 13-14 किमी दूर है। आठ जुलाई को प्रीती का सड़क हादसे में दायां हाथ व पैर फ्रैक्चर हो गया था। अवसर देखकर महंगी हो गईं निजी एंबुलेंस

102 व 108 एंबुलेंस कर्मी इन दिनों हड़ताल पर हैं तो निजी एंबुलेंस का किराया महंगा हो गया। जिला अस्पताल के पड़ोस मार्ग किनारे खड़ी निजी एंबुलेंस कर्मी ने पूछने पर कहा, केजीएमयु तक रोगी को ले जाने में 2500 रुपये लगेंगे। आक्सीजन प्रयोग करेंगे तो 500 रुपये और लगेंगे। वैसे सामान्य दिनों में यही एंबुलेंस वाले हजार-डेढ़ हजार रुपये तक में ही राजी हो जाते थे।

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