जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट स्थापना कार्य शुरू

जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम गुरुवार

JagranThu, 06 May 2021 10:17 PM (IST)
जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट स्थापना कार्य शुरू

सीतापुर : जिला अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने का काम गुरुवार से शुरू हो गया है। यह प्लांट भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) स्थापित करा रहा है। एनएचएआइ के अधिशाषी अभियंता प्रमोद सिंह ने बताया, जिला अस्पताल में पीछे टंकी के समीप प्लांट लगाया जा रहा है। बताया, इस प्लांट से प्रति मिनट में एक हजार लीटर ऑक्सीजन का उत्पादन होगा। यह प्लांट अधिकतम दस दिन में पूरा हो जाएगा।

अभियंता ने बताया, ऑक्सीजन प्लांट लगने का काम जल्द पूरा हो इसके लिए वह खुद मौके पर रहकर निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने बताया, प्लांट कितने में बनकर तैयार होगा यह तो अभी नहीं पता है, पर मशीनों की आपूर्ति के लिए उच्च स्तर पर बातचीत फाइनल हो गई है। बताया, एनएचएआइ के परियोजना निदेशक एनएन गिरि खुद जिला अस्पताल में स्थापित हो रहे ऑक्सीजन प्लांट की पल-पल में अपडेट ले रहे हैं। कार्य शुरू कराया है इस संबंध में उच्च स्तर पर अधिकारियों को जानकारी भी दी गई है। अगले दो-तीन दिन में मशीने भी आ जाएंगी। कार्य शुरू होने के दौरान जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल व अन्य स्टाफ भी मौजूद था। --------------

सीएमएस ने गठित की तीन सदस्यीय जांच समिति, मांगी रिपोर्ट

सीतापुर : जिला अस्पताल के सारी (सिवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस) में रोगियों के तीमारदारों से ऑक्सीजन बेचने के मामले में सीएमएस ने जांच समिति गठित कर दी है। इसमें वरिष्ठ परामर्शदाता डा. केडी पांडेय, चिकित्सा अधीक्षक डा. एके शुक्ल व मात्रिका आशा सिंह को जांच समिति में शामिल किया है। सीएमएस ने इन जांच अधिकारियों से अगले तीन दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

आपको बता दें, जिला अस्पताल के सारी वार्ड में रोगियों व तीमारदार के साथ डाक्टर व नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार को लेकर दैनिक जागरण ने गुरुवार के अंक में खुलासा किया। एक तीमारदार ने फोन पर दैनिक जागरण के सामने आपबीती सुनाई थी। उसने यह भी बताया था कि उसके पिता का ऑक्सीजन लेवल लगातार डाउन होता जा रहा है। बाजार में उसे ऑक्सीजन गैस सिलिडर नहीं मिल पाया। पिता की जान पर जब बन आई तो मजबूरन उसने ऑक्सीजन के लिए अस्पताल कर्मियों को पांच हजार रुपये देने पड़े। यही नहीं, उसने बातचीत में अस्पताल स्टाफ के अमानवीय व्यवहार का भी बखान किया। एक डाक्टर का उसने कई बार नाम लेकर बताया कि वह तमीरदारों के सहमत होने पर रोगी को कोविड पॉजिटिव व निगेटिव करने तक का पैसा लेते हैं। तह तक जाना व घृणित कार्य करने वाले को खोजना है : सीएमएस

मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम बनाने के संबंध में गुरुवार को सीएमएस डॉ. अनिल अग्रवाल ने एक आदेश जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि, जिला अस्पताल में किसी मरीज को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए किसी कर्मी ने पैसे लिए है। ऐसा मामला सामने आया है। सीएमएस ने पत्र में कहा है कि यह अत्यंत खेद का विषय है और मान्यता के खिलाफ है। इससे अस्पताल प्रशासन एवं सरकार की भी छवि धूमिल होती है। सीएमएस ने कहा है कि इस पूरे मामले की तह तक जाना और घृणित कार्य करने वालों को खोजना और उनके विरुद्ध कार्रवाई करना बेहद जरूरी है। सीएमएस ने तीन सदस्यीय जांच टीम को रिपोर्ट देने के लिए अगले दिन तक का मौका दिया है।

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