बैंक और बाजारों में रहे सतर्क, बचाव के नियमों का करें पालन

निगरानी समितियों की बैठक में डीएम ने दिए निर्देश

JagranTue, 25 May 2021 12:26 AM (IST)
बैंक और बाजारों में रहे सतर्क, बचाव के नियमों का करें पालन

सीतापुर : सदर तहसील में मुहल्ला निगरानी समितियों की बैठक में डीएम विशाल भारद्वाज ने आशा कार्यकर्ता व एएनएम को लक्षणयुक्त मरीजों को दवा वितरण का निर्देश दिया। कोरोना संक्रमण की रोकथाम में सहयोग के लिए सभी नागरिकों, विभागों के कर्मचारियों, फ्रंटलाइन वर्कर व सामाजिक कार्यकर्ताओं को धन्यवाद भी दिया। डीएम ने बैंक व बाजारों में सतर्कता बरतते हुए शारीरिक दूरी के नियम का पालन करने की अपील की। स्वास्थ्य कर्मी घर-घर जाकर दवाओं का वितरण अवश्य कराएं। उपलब्धता के सापेक्ष एंटीजन या आरटीपीसीआर जांच कराई जाए।

कोविड से बचाव में टीकाकरण है सबसे प्रभावी

डीएम ने कहा कि, कोविड से बचाव में टीकाकरण सबसे प्रभावी है। 45 वर्ष से ऊपर के लोगों को प्रेरित कर शत प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित कराए जाने का निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि संभावित तीसरी लहर के ²ष्टिगत टीकाकरण की उपयोगिता और अधिक है। डीएम ने आशा, आंगनबाड़ी व एएनएम से बात कर उनकी समस्याओं के बारे में पूछा। पल्स आक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर आदि उपकरण खराब होने पर तत्काल उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश अधिकारियों को दिया। एसडीएम सदर अमित भट्ट, सीओ सिटी पियूष सिंह, अतिरिक्त मजिस्ट्रेट पूनम भास्कर मौजूद रहीं। 90 से नीचे कम ऑक्सीजन पर कोविड अस्पताल में भर्ती होंगे बच्चे

सीतापुर : स्वास्थ्य अधिकारी आने वाले दिनों में कोविड का असर बच्चों पर होने की संभावना जता रहे हैं। इसी क्रम में नए दिशा-निर्देश भी जारी हो गए हैं। नए निर्देशों के मुताबिक सिर्फ कोरोना से ग्रसित गंभीर बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होगी। सामान्य बीमारी से ग्रसित बच्चों को होम आइसोलेशन में रखने की सलाह दी गई है।

सीएमओ डॉ. मधु गैरोला बताती हैं कि नए निर्देशों के मुताबिक, जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे गिरता है, उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती कराना रहेगा। नई गाइडलाइन में बच्चों को स्टेरायड देने की मनाही की गई है। सिर्फ गंभीर बच्चों को जरूरत पड़ने पर ही यह दवा देने की अनुमति है। इसके अलावा कोविड के इलाज में इस्तेमाल हो रही रेमडिसिविर, आइवरमेक्टिन, फैविपैराविर जैसी दवाओं को बच्चों को देने से मना किया गया है। जिन बच्चों का आक्सीजन लेवल 90 से कम आता है, उन्हें गंभीर निमोनिया, एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिड्रोम, सैप्टिक शाक, मल्टी आर्गन डिस्फक्शन सिड्रोम जैसी बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे मरीजों को फौरन किसी कोविड अस्पताल में भर्ती कराया जाना होगा। यदि जरूरत पड़े तो आइसीयू में शिफ्ट कराया जाएगा। इस तरह के बीमार बच्चों को स्टेरॉयड दिए जा सकते हैं। कुछ बच्चे बुखार के साथ पेट दर्द, उल्टी व दस्त की समस्या के आ सकते हैं, उनका भी कोरोना मरीज के तौर पर इलाज किया जाना होगा। बीमार बच्चों का स्टूल टेस्ट कराने पर पुष्ट हो जाएगा कि उन्हें कोरोना है या नहीं। इसके अलावा कुछ बच्चों में मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिड्रोम (एमएसआइएस) भी हो सकता है। इसके लिए भी विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है। सीएमओ ने बताया, विशेषज्ञों ने कहा है कि अधिकांश बीमार बच्चे लक्षणविहीन हो सकते हैं, इसलिए उनके इलाज में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत रहेगी।

ये हो सकते है लक्षण

विशेषज्ञों ने डॉक्टरों से कहा है कि ज्यादातर बच्चे लक्षणविहीन या हल्के-फुल्के लक्षण वाले हो सकते हैं। उनमें बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, सूंघने व टेस्ट की क्षमता में कमी आना, नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खरास हो सकती है। कुछ बच्चों में दस्त आना, उल्टी होना, पेट दर्द हो सकता है। कुछ में मल्टी सिस्टम इंफ्लामेट्री सिड्रोम होगा।

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