दवा नहीं, फरेब छिड़क रहा स्वास्थ्य महकमा

सीतापुर : सेहत महकमे के जिम्मेदारों की संवेदनाएं शून्य हो चुकी हैं। पिछले कई महीनों से जिले में डेंगू का डंक लोगों को बीमार कर रहा था, लेकिन अधिकारियों को कोई फिक्र नहीं। शुरुआत अटरिया में दो मौतों से होती है, फिर खैराबाद में जानलेवा बीमारी का प्रकोप फैल जाता है, पर विभाग अनजान बना रहता है। नतीजतन, यहां से 75 किमी दूर रेउसा, फिर लहरपुर में डेंगू दस्तक देता है। सीएमओ आरके नैयर से लेकर मच्छर से निपटने की जिम्मेदारी संभालने वाले एसीएमओ डॉ. सुरेंद्र सिंह फिर भी नहीं जागे। लोग बीमार होते गए, मरते गए, लेकिन जिम्मेदार ये मानने को तैयार नहीं हुए कि डेंगू से मौत हुई है। बुखार से तड़पते लोग सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराते रहे, रिपोर्ट में डेंगू निकलता रहा, लेकिन विभाग कहता रहा कि प्राइवेट पैथोलॉजी पैसे कमाने के लिए गलत रिपोर्ट बना देती हैं, कहीं कुछ नहीं है। सबकुछ सामान्य है। भारी-भरकम बजट आने के बाद भी फॉगिग और एंटी लार्वा का छिड़काव आंकड़ों तक सीमित रहा।

गांवों की संख्या सरकारी कागजों में दर्ज कर विभाग 'फरेब' छिड़कता रहा। इसका खामियाजा सीडीपीओ जितेंद्र सिंह राठौर को डेंगू के डंक से अपनी जान देकर चुकाना पड़ा। परियोजना अधिकारी की मौत से जिम्मेदार जागे तो जरूर, लेकिन कार्रवाई अब भी रस्मअदायगी तक सिमटी हुई है।

मलेरिया विभाग बीमार

मच्छरों से निपटने की जिम्मेदारी जिला मलेरिया अधिकारी अनिल मिश्रा और उनकी टीम की है, लेकिन हैरानी की बात है कि बात है विभाग खुद ही बीमार है। फॉगिग के लिए 10 मशीनें तो हैं, लेकिन उसमें सात खराब ही पड़ी हैं। तीन मशीनों से जिले भर में छिड़काव कैसे होता होगा, ये बताने की जरूरत नहीं। -----------------

डेंगू के नए रोगियों के मिलने पर जिला मलेरिया विभाग और सीएचसी की टीमें फॉगिग कर एंटी लार्वा का छिड़काव करती हैं। रोजाना शहर में फॉगिग होती है।

डॉ. सुरेंद्र सिंह, एसीएमओ

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