सिकौहा नहीं, इसे जैविक गांव कहिए..

सिकौहा नहीं, इसे जैविक गांव कहिए..

जितेंद्र अवस्थी सीतापुर सिकौहा गांव के 60 फीसद किसान कर रहे जैविक खेती

JagranSat, 27 Feb 2021 11:42 PM (IST)

जितेंद्र अवस्थी, सीतापुर :

रेउसा में एक गांव ऐसा भी है, जिसकी पहचान अब जैविक गांव के रूप में की जाती है। गांव के करीब 60 फीसद किसान जैविक खेती अपना चुके हैं। फसलों में डालने के लिए नीम की पत्तियों से कीटनाशक तैयार करते हैं। केंचुआ खाद भी खुद ही बनाते हैं और बेसहारा पशुओं को भी संरक्षण देते हैं, इस जैविक गांव का नाम सिकौहा है। सिकौहा गांव के किसानों ने गो-आधारित जैविक खेती को अपनाया है। गांव को जैविक गांव बनाने की पहले की है किसान श्वेतांक त्रिपाठी ने। श्वेतांक खुद तो जैविक खेती करते ही हैं, गांव के किसानों को भी गो-आधारित खेती का पाठ पढ़ाते हैं। श्वेतांक की पहल पर अमल कर गांव के कई किसान इस खेती से जुड़ चुके हैं।

11 सदस्यीय टीम कर रही किसानों को जागरूक

गो-आधारित जैविक खेती से किसानों को जोड़ने के लिए 11 लोगों की एक समिति बनी है। समिति के सदस्यों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गईं हैं। गांव के लोगों को जैविक खेती के गुर सिखाने के साथ ही यह टीम अन्य गांवों में भी जाती है। नीम से मिलती ऑक्सीजन और बनता कीटनाशक

सिकौहा गांव में 100 से अधिक लोगों ने अपने दरवाजे पर नीम का पेड़ लगा रखा है। श्वेतांक कहते हैं कि, लोगों केा नीम के पेड़ के फायदे गिनाए गए और के सामने पौधारोपण कराया गया। नीम से ऑक्सीजन मिलती है और फसलों के लिए कीटनाशक तैयार किया जाता है। बेसहारा गायों को दे रहे संरक्षण

सिकौहा गांव के किसान खेतों में घूमने वाली बेसहारा गायों का संरक्षण करते हैं। गाय के गोबर का प्रयोग खाद के रूप में होता है। गौ-मूत्र से दवा बनाकर फसलों पर छिड़काव भी करते हैं। रामनरेश यादव, किशोरी, राजकुमार आदि ने गायों को संरक्षित किया है। जैविक खेती कर रहे हैं ये किसान

सिकौहा गांव के 100 से अधिक किसान जैविक खेती कर रहे हैं। रामस्वरूप भार्गव, रामू, शरद, रमाकांत, रमेश, सुमन, ललित सिंह आदि किसान गो-आधारित जैविक खेती कर रहे हैं। गांव में दो दूध कलेक्शन सेंटर बने हैं।

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