विद्यालयों पर नहीं पहुंच सकीं किताबें

शिक्षा विभाग की लापरवाही का कोई जवाब नहीं है। लंबे समय बाद विद्यालय खुल भी गए तो कहीं भी निश्शुल्क पुस्तकें नहीं पहुंच सकी है। ये हाल बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के गृह तहसील क्षेत्र का है अन्य स्थानों पर क्या स्थिति होगी इसका सहजता पूर्वक बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है।

JagranWed, 01 Sep 2021 11:57 PM (IST)
विद्यालयों पर नहीं पहुंच सकीं किताबें

सिद्धार्थनगर : शिक्षा विभाग की लापरवाही का कोई जवाब नहीं है। लंबे समय बाद विद्यालय खुल भी गए तो कहीं भी निश्शुल्क पुस्तकें नहीं पहुंच सकी है। ये हाल बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार के गृह तहसील क्षेत्र का है, अन्य स्थानों पर क्या स्थिति होगी, इसका सहजता पूर्वक बस अंदाजा ही लगाया जा सकता है। सवाल ये भी है कि जब किताब है ही नहीं, फिर भला विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति कैसे बढ़ेगी।

कोरोना संक्रमण के चलते काफी महीनों तक विद्यालय बंद रहे। इधर सरकार ने पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को 16 अगस्त 2021 से खोल दिया है, जबकि प्राथमिक विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य पहली सितंबर यानी आज बुधवार से शुरू हुआ। आश्चर्य तो ये है कि विद्यालय बंद होने के बाद भी विभाग इसकी कोई तैयारी नहीं कर सका। 28 अगस्त को बीआरसी पर पुस्तकें भेज दी गई, जिन्हें अभी स्कूलों तक पहुंचना बाकी है। नियम तो ये है कि विद्यालयों तक पुस्तकें उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए बाकायदा इस मद में धन भी खर्च किया जाता है, परंतु स्कूलों के बजाए पुस्तकें ब्लाक संसाधन केंद्र पर भेज दी गई, अब यहां से स्कूलों तक किताबें कैसे पहुंचेगी, यह अधिकारियों के लिए सोचनीय विषय है।

एक शिक्षक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पुस्तकों की उठान और उसे विद्यालय पर पहुंचाने के लिए पैसा खर्च किया जाता है, परंतु स्कूलों पर किताबें उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं, अब शिक्षकों पर दबाव बनाया जाएगा, कि वे पुस्तकों को अपने खर्च पर विद्यालय तक ले जाएं, जो पूरी तरह से गलत है। खंड शिक्षाधिकारी इटवा कुंवर विक्रम पाण्डेय ने कहा कि नियम तो ये है कि जिले से ही पुस्तकें विद्यालय तक पहुंचाई जाएं। लेकिन किताबों को यहीं बीआरसी पर भेज दिया गया है। जिसकी छंटाई करा रहे हैं, कल-परसों तक इसका वितरण प्रारंभ कराया जाएगा।

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