51 हजार दीपों से जगमगाएगा होगा राप्ती तट

दैनिक जागरण के तत्वावधान में शुक्रवार को बांसी में राप्ती नदी के किनारे रानी मोहभक्त घाट 51 हजार दीये से जगमग होगा। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद बार एसोसिएशन शिक्षक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और टीम समर्पण की तरफ दीये सजाए जाएंगे।

JagranWed, 17 Nov 2021 11:02 PM (IST)
51 हजार दीपों से जगमगाएगा होगा राप्ती तट

सिद्धार्थनगर: दैनिक जागरण के तत्वावधान में शुक्रवार को बांसी में राप्ती नदी के किनारे रानी मोहभक्त घाट 51 हजार दीये से जगमग होगा। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, बार एसोसिएशन, शिक्षक संगठन, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और टीम समर्पण की तरफ दीये सजाए जाएंगे। कस्तूरबा विद्यालय की छात्राएं दीप सजाएंगी। स्वयं सहायता संगठन की महिलाएं अपने घरों से 21-21 दिए लेकर आएंगे। कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अतिरिक्त अयोध्या के बाबा हनुमान गढी के महंत बाबा बलराम दास, दशरथ गद्दी के महंत बाबा बृजमोहन दास दी भी मौजूद रहेंगे।

कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व

कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर स्वर्ग में भी देवता दीप जलाते है इसलिए इसे देव दिवाली कहा जता है। इस तिथि को ही भगवान शिव ने त्रिपुर नामक राक्षस का वध किया था, तब देवताओं ने स्वर्ग में दीप जलाकर दिवाली मनाई थी। तथा भगवान शिव का स्वागत किया था। तभी यह परंपरा चली आ रही है। कार्तिक पूर्णिमा एक ऐसा मौका है जब सभी देवता एक साथ पृथ्वी पर अवतरित होते हैं। इसलिए भारतीय शास्त्र व धर्म में कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व है।

कार्तिक पूर्णिमा पर तीनों लोक दियों की रोशनी से जगमग होते हैं। इसलिए इसका विशेष महत्व है। आज के दिन खुले आसमान में खीर पकाने व सामूहिक रूप से खाने का भी महत्सव है। इस दिन को विशेष बनाने के लिए दैनिक जागरण बांसी के राप्ती नदी तट के रानी लक्ष्मी मोह भक्त घाट पर 51हजार दीप जलाए जाएंगे। जिसकी तैयारी की जा रही है।

ज्योतिर्विद पंडित सतीश मणि त्रिपाठी ने बताया कार्तिक पूर्णिमा पर ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान शिव के स्वागत के लिए, सभी देवी-देवता एक साथ पृथ्वी पर अवतरित होते हैं।

वैष्णव संप्रदाय के अनुयायियों द्वारा, कार्तिक माह को अत्यधिक महत्व दिया जाता है, और इसी कारण कार्तिक पूर्णिमा पर दान-पुण्य का कार्य शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा का पुष्कर सरोवर राजस्थान के पुष्कर में धरती पर अवतरित हुआ था। इसी कारण पौराणिक काल से आज भी पुष्कर मेला देवोत्थानी एकादशी से शुरू होता है और इस मेले का समापन कार्तिक पूर्णिमा पर होता है। ब्रह्मा के सम्मान में आयोजित किये गए इस मेले में, दुनियाभर से श्रद्धालु हर साल आते हैं, और पुष्कर में स्थित भगवान के अनोखे मंदिर के दर्शन करते हैं। माना गया है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन पुष्कर सरोवर में आध्यात्मिक स्नान करना न केवल हर मानव के लिए फलदायी होता है, बल्कि इससे उसे अपने समस्त पापों से मुक्ति मिलती है। देव दीपावली पर ज्योतिष की माने तो कार्तिक पूर्णिमा के दिन सूर्योदय से पहले उठकर, गंगा नदी में स्नान करना चाहिए। यदि ऐसा करना संभव न हो तो, आप नहाने के पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें भी मिला सकते हैं। माना गया है कि ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन के सभी पूर्व के पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान सत्यनारायण की पूजा और कथा का आयोजन भी, शुभ फलदायक है। इस दिन तुलसी के पौधे के सामने एक दीपक जरूर जलाएं, इससे आपको अत्यंत शुभ फल मिलेंगे। पितरों की आत्मा की शांति के लिए भी, इस दिन एक दीपक जलाएं। घर के पूर्व दिशा की ओर मुख करके दीपक जलाने से, व्यक्ति को भगवान से आशीर्वाद स्वरूप दीर्घ आयु और स्वस्थ जीवन की प्राप्ति होती है। साथ ही घर-परिवार में भी सुख-शांति का वास होता है। इस दिन रात के समय चांदी के पात्र से, चंद्रमा को जल चढ़ाने से जातक की कुंडली में मन के कारक चंद्रमा की स्थिति मजबूत होगी। इस तिथि पर वस्त्र, भोजन, पूजा सामग्री, दीये जैसी वस्तुओं का दान करना, जीवन में सौभाग्य लाता है। इस दिन क्रोध, गुस्सा, ईष्र्या, आवेश और क्रूरता, जैसी भावनाएं अपने मन में न आने दें। घर-परिवार में शांतिपूर्ण वातावरण बनाकर रखें। कार्तिक पूर्णिमा के दिन, भूल से भी तुलसी के पत्तों का स्पर्श न करें और न ही उन्हें तोड़ें।

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