एक बार रक्तदान कर बचा सकते हैं तीन जीवन: कुलपति

कुलपति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय प्रो. सुरेंद्र दुबे ने सोमवार को विश्व रक्तदान दिवस पर कहा कि रक्तदान करना महत्वपूर्ण और पवित्र कार्य है। बगैर किसी स्वयं के नुकसान से हम एक से अधिक लोगों का जीवन बचा सकते हैं। अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से एक यूनिट रक्तदान से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है।

JagranMon, 14 Jun 2021 11:33 PM (IST)
एक बार रक्तदान कर बचा सकते हैं तीन जीवन: कुलपति

सिद्धार्थनगर : कुलपति सिद्धार्थ विश्वविद्यालय प्रो. सुरेंद्र दुबे ने सोमवार को विश्व रक्तदान दिवस पर कहा कि रक्तदान करना महत्वपूर्ण और पवित्र कार्य है। बगैर किसी स्वयं के नुकसान से हम एक से अधिक लोगों का जीवन बचा सकते हैं। अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से एक यूनिट रक्तदान से तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। प्लाज्मा, लाल रक्त रुधिर एवं श्वेत रक्त रुधिर तीन तत्व रक्त में पाए जाते हैं। जागरूकता के अभाव के कारण विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान करने को लेकर भ्रम की स्थिति है। स्वस्थ स्त्री व पुरुष में भ्रम की स्थिति होती है कि रक्तदान करने से वह कमजोर हो जाएंगे। वास्तविकता इससे विपरीत है। विशेषज्ञ चिकित्सकों का यह मानना है कि रक्तदान से ना केवल हम किसी का जीवन बचा सकते हैं बल्कि स्वयं रक्तदाता को शरीर में विभिन्न प्रकार की व्याधियों से मुक्ति मिलती है। सीएमओ समेत पांच ने किया रक्तदान सिद्धार्थनगर: विश्व रक्तदान दिवस पर सोमवार को सीएमओ डा. संदीप चौधरी समेत पांच लोगों ने रक्तदान किया। संयुक्त जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में आयोजित कार्यक्रम में सीएमओ डा. चौधरी ने कहा कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है। एक युनिट रक्त देकर तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि जरूरतमंदों को खून के लिए न भटकना पड़े, इस लिए लोगों के रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन समन्वयक डा. अनार सिंह धाकड़, अखंड प्रताप सिंह, नितिन कुमार श्रीवास्तव आदि ने रक्तदान किया। सीएमएस डा. नीना वर्मा, ब्लड बैंक प्रभारी डा. मनोज कुमार तिवारी, अशोक कुमार तिवारी आदि मौजूद रहे। खून देकर बचाई महिला मरीज की जान

शोहरतगढ़ : विश्व रक्तदान दिवस के पूर्व मध्य रात में गड़ाकुल निवासी राहुल पटेल ने एक महिला के पेट की सर्जरी लिए जिला अस्पताल में एक यूनिट रक्तदान किया। जिससे मरीज की जान बचाई जा सकी है।

गड़ाकुल निवासी संतोष विश्वकर्मा की पत्नी पूजा के पेट की नस फट गई गई। स्वजन ने उसे जनपद मुख्यालय पर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया। डाक्टरों को सर्जरी के लिए तत्काल ए पाजिटिव खून की आवश्यकता पड़ी। स्वजन खून के लिए इधर उधर परेशान होने लगे। जानकारी होते ही राहुल पटेल ने तत्काल रात में ही जिला अस्पताल पहुंचकर रक्त उपलब्ध करा दिया। उन्होंने जिदगी और मौत से जूझ रही महिला की मदद की। इसकी सराहना हो रही है। पटेल ने कहा कि हमारा उद्देश्य है समाज के लोगों की मदद व सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देना है।

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