भारतभारी में अब जैविक विधि से चने की खेती

भारतभारी नगर पंचायत में धान- गेहूं की जैविक खेती के बाद अब दलहनी फसल भी इसी विधि से उगाई जा रही है। गांव निवासी हरिभजन गोंड़ ने इस बार दो बीघे में चने की खेती जैविक विधि से प्रारंभ की है। उनका कहना है कि इस विधि से उगाए गए अनाज की गुणवत्ता और उत्पादकता बेहतर होती है तथा उपज की कीमत भी अधिक मिलती है।

JagranTue, 07 Dec 2021 10:15 PM (IST)
भारतभारी में अब जैविक विधि से चने की खेती

सिद्धार्थनगर : भारतभारी नगर पंचायत में धान- गेहूं की जैविक खेती के बाद अब दलहनी फसल भी इसी विधि से उगाई जा रही है। गांव निवासी हरिभजन गोंड़ ने इस बार दो बीघे में चने की खेती जैविक विधि से प्रारंभ की है। उनका कहना है कि इस विधि से उगाए गए अनाज की गुणवत्ता और उत्पादकता बेहतर होती है तथा उपज की कीमत भी अधिक मिलती है। इसलिए दलहनी फसल की खेती जैविक खादों के साथ कर रहे हैं।गांव के प्रगतिशील किसान रमेश कुमार पांडेय पिछले पांच वर्षो से जैविक विधि से कालानमक धान और गेहूं की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के परामर्श के बाद इस तरह की खेती प्रारंभ की जिससे उन्हें बेहतर उत्पादन के साथ पौष्टिकता से भरपूर फसल प्राप्त हो रही है। बिक्री करने पर जैविक अनाज होने के चलते दाम भी बेहतर मिलते हैं। उनसे प्रेरित होकर गांव के अन्य किसान भी जैविक खेती का हिस्सा बन रहे हैं। हरिभजन ने इस बार जैविक विधि से चना उगाने की ठानी है। बताते हैं कि जिस खेत में उन्होंने चने की बोआई की है उसमें डेढ़ माह पहले धान की फसल थी। कटाई के बाद पराली को जोताई करवाकर मिट्टी में दबाया और खेत में पानी भर कर छोड़ दिया। जो सड़क बेहतर खाद बन गई। कृषि विज्ञानियों से संपर्क कर उन्होंने खेत में गोबर की खाद डाली तथा गुड़, गोबर और नीम की पत्तियों से बीजोपचार कर दलहनी फसल को बोया। मौजूदा समय में पौधे तेजी से विकसित हो रहे हैं, जिसमें पानी चलाया जा रहा है। कृषि विज्ञानी डा. मारकंडेय सिंह कहते हैं कि एक ही खेत में लगातार धान और गेहूं की बोआई से भूमि की उर्वरा शक्ति पर असर पड़ता है। दलहनी फसल बीच-बीच में लेने से इसमें सुधार होता है। अगर जैविक विधि से दलहनी फसल उगाई जाए तो उर्वरा शक्ति तो बढ़ेगी ही, उत्पादन भी बेहतर मिलेगा। मोटर जलने से आपूर्ति ठप सिद्धार्थनगर :वासा दरगाह जलापूर्ति के लिए लगाई गई मोटर जलने से कई गांवों में आपूर्ति ठप हो गई है। पेय जल पाइप लाइन का कोई मतलब नहीं रह गया है। यहां से पूरब डीह, पश्चिम डीह, उत्तर डीह, दक्षिणडीह, फतेहपुर, डाकखाना डीह तथा वासा दरगाह की बड़ी आबादी को शुद्ध जल मिलता था। गांव के तौकीर, असलम, खालिद, लतीफ, फरहान, सुरेश गौतम, राम प्रसाद आदि ने बताया है कि मोटर जलने से दो महीने से जलापूर्ति ठप है। इस मामले में अधिशासी अभियंता जल निगम धर्मेंद्र कुमार ने कहा कि जानकारी नहीं थी, मोटर शीघ्र बनवा दिया जाएगा। जर्जर मार्ग के मरम्मत की ग्रामीणों ने की मांग सिद्धार्थनगर : बांसी तहसील क्षेत्र में डुमरियागंज मार्ग पर स्थित पाला से कोड़राव नानकार मार्ग गड्ढों में तब्दील हो गया है। तीन किमी लंबे इस मार्ग से आठ गावों के ग्रामीण रोजाना सफर करते हैं। गड्ढों के कारण वाहन चालक इस सड़क से नहीं सफर कर रहे हैं। वह आठ किमी लंबा चक्कर काटकर गांव तक पहुंचते हैं। क्षेत्रवासी अंजुम, मोहम्मद रहीम, लालजी चौधरी, कृष्ण चंद्र चौधरी, बीरबली आदि ने आरोप लगाया कि करीब पांच वर्ष पूर्व सड़क पर मरम्मत कार्य कराया गया था। लेकिन मानक की अनदेखी करने के कारण यह कुछ दिन में टूट गई है। लोगों ने प्रशासन से मार्ग मरम्मत कराने की मांग किया है।

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