लगाई डुबकी, तिल व गुण का किया दान

लगाई डुबकी, तिल व गुण का किया दान

डुमरियागंज भारतभारी में कोविड गाइडलाइन के अनुरूप कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया गया।

Publish Date:Mon, 30 Nov 2020 11:41 PM (IST) Author: Jagran

सिद्धार्थनगर: कार्तिक पूर्णिमा के मौके पर श्रद्धालुओं ने जिले के विभिन्न पवित्र नदियों व सरोवरों में स्नान कर तिल व गुण का दान किया। इस मौके पर सुख समृद्धि के लिए विविध अनुष्ठान का भी आयोजन किया गया। स्नान को लेकर कई नदी तट व सरोवर पर मेले जैसा माहौल रहा। जिला मुख्यालय से सटे जोगिया के ककरही घाट पर लोगों ने स्नान करने के साथ गोदान कर सुख समृद्धि की कामना की।

इसके अलावा बांसी में राप्ती नदी तट, उसका बाजार में कूड़ा नदी, बढ़नी, शोहरतगढ़ व लोटन से होकर गुजरने वाली नदी में सूर्योदय से पूर्व ही स्नान कर दान किया। कोविड-19 को लेकर प्रशासन की सख्ती के चलते मेले में दुकानें तो नहीं लगी लेकिन कई जगहों पर श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण मेले जैसा माहौल कायम रहा। पवित्र नदी व सरोवर में स्नान के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ भोर में ही नदी तट व सरोवर पर पहुंच गई थी। इस दौरान भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर सुरक्षा का बेहतर प्रबंध किया गया था। जोगिया में योगमाया मंदिर पर श्रद्धालुओं की भीड को लेकर महिला व पुरुष कांस्टेबल की तैनाती की गई थी।

डुमरियागंज भारतभारी में कोविड गाइडलाइन के अनुरूप कार्तिक पूर्णिमा का पर्व मनाया गया। सुबह चार बजे भारतभारी के ऐतिहासिक सरोवर में श्रद्धालुओं के डुबकी लगाने का जो सिलसिला शुरू हुआ वह सूर्योदय तक जारी रहा। लोगों ने भगवान भास्कर को अ‌र्घ्य देकर उत्तम स्वास्थ्य के साथ सुख समृद्धि का आशीर्वाद मांगा। शिव मंदिर में जलाभिषेक का कार्यक्रम पूरे दिन चलता रहा। इस बार कार्तिक पूर्णिमा का ऐतिहासिक मेला नहीं लगा, लेकिन आस्था से परिपूर्ण माहौल दिखा। परिसर में चल रहे अखंड कीर्तन व अनुष्ठान में भी भक्तों ने सहभागिता की। राप्ती नदी तट पर सुबह पांच बजे से स्नान का कार्यक्रम शुरू हुआ। लोगों ने लक्ष्मीनारायण मंदिर में माथा टेका। कुशेश्वरनाथ सरोवर में भी भक्तों का स्नान सुबह आठ बजे तक चला। लोगों ने भोलेनाथ के दर्शन किए। घरों में श्री सत्यनारायण भगवान की कथा का आयोजन कर पुरोहितों को भोजन कराया गया। धार्मिक अनुष्ठान कसे सकुशल संपन्न कराने के लिए एसडीएम त्रिभुवन, सीओ उमेश शर्मा, तहसीलदार राजेश प्रताप सिंह, कोतवाल केडी सिंह आदि विभिन्न स्थानों पर मुस्तैद रहे।

पं. श्यामसुंदर मिश्रा के मुताबिक पौराणिक कथा के अनुसार, देवता अपनी दीपावली कार्तिक पूर्णिमा की रात को ही मनाते हैं। इसलिए, यह सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन स्नान और दान को अधिक महत्व दिया जाता है। इस दिन किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर दीप दान को भी विशेष महत्व दिया जाता है। माना जाता है कि इस दिन दीप दान करने से सभी देवताओं का आशीर्वाद मिलता हैं।

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