चलेगी नहर तो तराई की बंजर भूमि उगलेगी सोना

श्रावस्ती तराई के खेत अब सोना उगलेंगे। सिचाई की व्यवस्था न होने से बंजर का शक्ल ले चुकी

JagranFri, 03 Dec 2021 11:50 PM (IST)
चलेगी नहर तो तराई की बंजर भूमि उगलेगी सोना

श्रावस्ती : तराई के खेत अब सोना उगलेंगे। सिचाई की व्यवस्था न होने से बंजर का शक्ल ले चुकी नेपाल सीमा से सटी सैकड़ों एकड़ क्षेत्रफल की कृषि योग्य भूमि पर भी अब फसलें लहलहाएंगी। सरयू नहर परियोजना की शुरुआत होने के बाद यह बदलाव नजर आएगा। श्रावस्ती के अलावा बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर व महराजगंज जिले के किसानों को भी इसका लाभ मिलेगा।

नेपाल सीमा पर स्थित श्रावस्ती जिले का कुल क्षेत्रफल 1633.78 वर्ग किलोमीटर है। इस पर लगभग 12 लाख की आबादी निवास करती है। यहां एक लाख 34 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल कृषि योग्य भूमि है। इसमें से लगभग 82 हजार हेक्टेयर सिचित भूमि है। छोटे जोत के किसानों की यहां अधिकता है। खेती-किसानी में धान, गेहूं व गन्ने का उत्पादन प्राथमिकता से होता है। नेपाल के पहाड़ों से सटा जनपद होने से यहां की ककरीली, पथरीली जमीन पर बोरिग पास नहीं हो पाती है। हजारों की संख्या में किसान प्रकृति के भरोसे रबी व खरीफ के फसलों की खेती करते हैं। लगातार घाटा होता देख सिरसिया व जमुनहा क्षेत्र के बड़ी संख्या में किसानों ने खेतों को परती छोड़ रखा है। यह किसान चमत्कारिक बदलाव की आस लगाए थे। यह चमत्कार अब हो गया है। वर्ष 1978 में शुरू हुई परियोजना को वर्ष 1982 में विस्तारित करते हुए बलरामपुर समेत नौ जिलों को इसमें जोड़ा गया था। लंबे समय से इसके अधूरे पड़े होने से नहर से सिचाई की उम्मीद को पंख नहीं लग पा रहे थे। 11 दिसंबर को सरयू नहर परियोजना देश को समर्पित होने जा रही है। 9802.68 करोड़ हुए खर्च

डीएम नेहा प्रकाश ने बताया कि सरयू नहर परियोजना के लिए घाघरा, राप्ती, बाण गंगा, सरयू व रोहणी नदी को आपस में जोड़ा गया है। इसकी पुनरीक्षित लागत 9802.68 करोड़ रुपये है। मार्च 2021 तक 9562.68 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना के तहत सरयू लिक चैनल, सरयू मुख्य नहर व इसकी समस्त शाखाएं, राप्ती लिक नहर व राप्ती मुख्य नहर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। सकारात्मक बदलाव की है उम्मीद

सिरसिया क्षेत्र में सिरसिया, बालू, घोलिया, तकिया, बालापुर, सोहेलवा, रनियापुर, बेलहरी, सर्राबोझी, जुड़पनिया, बभनी, घोघवा, कुसमहवा, रामपुर, चिल्हरिया, गब्बापुरवा समेत अन्य गांवों में बोरिग पास न होने से सैकड़ों एकड़ क्षेत्रफल परती पड़ी रहती है। जमुनहा क्षेत्र के किसान भी इसका दंश झेलते हैं। किसान वीरेंद्र प्रताप सिंह, रामप्रसाद, खेलावन ने बताया कि नहर शुरू होगी तो व्यापक स्तर पर सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। खेतों में फसलें लहलहाएंगी तो किसानों के दिन बदल जाएंगे।

रोमांचक गेम्स खेलें और जीतें
एक लाख रुपए तक कैश अभी खेलें

Tags
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.