बढ़ने लगा यमुना का जलस्तर, अलर्ट

यमुना के जलस्तर में इजाफा हो रहा है। हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तटवर्ती गांवों के लोगों को डर सताने लगा है। हालांकि चेतावनी बिदु से यमुना अभी काफी नीचे है लेकिन जिस मात्रा में बैराज से पानी छोड़ा जा रहा है उसे देखते हुए चिता लाजिमी है।

JagranWed, 28 Jul 2021 11:16 PM (IST)
बढ़ने लगा यमुना का जलस्तर, अलर्ट

शामली, जागरण टीम। यमुना के जलस्तर में इजाफा हो रहा है। हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में तटवर्ती गांवों के लोगों को डर सताने लगा है। हालांकि चेतावनी बिदु से यमुना अभी काफी नीचे है, लेकिन जिस मात्रा में बैराज से पानी छोड़ा जा रहा है, उसे देखते हुए चिता लाजिमी है।

पिछले दिनों पहाड़ों अधिक बारिश के चलते यमुना का जलस्तर बढ़ा था। 25 जुलाई को जलस्तर 229.35 मीटर पर पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद कमी आने लगी थी। मंगलवार को जलस्तर 228.70 मीटर पर था, लेकिन बुधवार शाम पांच बजे की रिपोर्ट अनुसार यमुना 228.95 मीटर पर बह रही थी। सुबह दस बजे बैराज से 34009 क्यूसेक पानी छोड़ा गया, लेकिन अगले घंटे यानी 11 बजे पानी की मात्रा बढ़कर 1.25 लाख क्यूसेक हो गई। इसके बाद शाम चार बजे तक हर घंटे इतना पानी ही छोड़ा जाता रहा है। शाम पांच बजे मात्रा और बढ़ गई और 1.27 लाख क्यूसेक पानी छोड़ गया।

ड्रेनेज खंड के अंवर अभियंता आशु कुमार ने बताया कि हथिनीकुंड बैराज से कैराना यमुना पुल तक पानी आने में 20 से 22 घंटे लगते हैं। वैसे चिता की बात नहीं है, लेकिन पूरी सतर्कता बरती जा रही है। तटबंधों की निगरानी लगातार हो रही है। कैराना में यमुना पुल पर चेतावनी बिदु 231 और खतरे का निशान 231.50 मीटर है।

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ऊन तहसील क्षेत्र बाढ़ चौकी, 04

इन गांवों को होता है खतरा

बिड़ौली, चौसाना, ऊदपुर, मंगलौरा, मुस्तफाबाद, नाई नगला, भट्टी माजरा, म्यान, केरटू, औदरी, बसी, चुंधियारी, साल्हापुर, सकौती, भड़ी, शीतलगढ़ी, ख्वाजपुर

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कैराना तहसील क्षेत्र बाढ़ चौकी, 04

इन गांवों को होता है खतरा

फतेहपुर, बल्हेड़ा, चौंतरा, कबीरपुर, कलरी, इस्सोपुर खुरगान, बसेड़ा, मंडावर, पठेड, रामडा, मोहम्मदपुर राई, मवी, नगला राई, हैदरपुर, मामौर, डुंडुखेड़ा, इस्सोपुर

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बढ़ी लोगों की चिता

चौसाना: क्षेत्र के भड़ी, साल्हापुर समेत कई तटवर्ती गांवों के लोगों को को डर सताने लगा है। यमुना की स्थिति पर ग्रामीण भी नजर रख रहे हैं। करीब-करीब हर साल ही यमुना के उफान पर आने से फसलों को नुकसान होता है। साथ ही गांव तक पानी आने का खतरा बना रहता है।

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