880 हेक्टेयर बढ़ा जिले में गन्ने का रकबा

शामली जेएनएन। जिले में गन्ने के क्षेत्रफल में इस बार 880 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। पौधा गन्ना

JagranSat, 24 Jul 2021 11:08 PM (IST)
880 हेक्टेयर बढ़ा जिले में गन्ने का रकबा

शामली, जेएनएन। जिले में गन्ने के क्षेत्रफल में इस बार 880 हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। पौधा गन्ना 10.96 फीसद बढ़ा है और 6.59 फीसद कम हुआ है। पिछले साल नौ हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल बढ़ा था।

जिले में शामली, ऊन और थानाभवन में चीनी मिल है। साथ ही काफी गांव जिले की गन्ना विकास परिषद में हैं, लेकिन उनका गन्ना भैंसाना, तितावी और खतौली चीनी मिल में जाता है। पेराई सत्र समाप्ति के बाद मई माह में सर्वेक्षण शुरू हो गया था। जुलाई के पहले सप्ताह में सर्वे कार्य समाप्त हुआ और अब गन्ना विभाग ने रिपोर्ट जारी कर दी है। वहीं, जिला गन्ना अधिकारी विजय बहादुर सिंह ने बताया कि वर्ष 2021-22 में पौधा गन्ना 37365 और पेड़ी गन्ना 39866 हेक्टेयर है। पिछले साल पौधा गन्ना 33673 और पेड़ी गन्ना 42678 हेक्टेयर था। रमाला चीनी मिल से जुड़े 20 गांव गन्ना विकास परिषद रमाला को वापस किए गए हैं और उक्त गांव का 3851 हेक्टेयर क्षेत्रफल सर्वे में शामिल नहीं है। सर्वे कार्य पूरा हो गया है और सट्टा प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों से आपत्ति ली जाएंगी और निस्तारण किया जाएगा। इसकी रूपरेखा जल्द तैयार कर ली जाएगी।

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मिलवार गन्ने का क्षेत्रफल

चीनी मिल, क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)

शामली, 22014

ऊन, 20688

थानाभवन, 22062

तितावी, 9528

खतौली, 2239

भैंसाना, 700

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कलक्ट्रेट में कल करेंगे किसान धरना-प्रदर्शन

शामली, जेएनएन। दिल्ली-देहरादून हाईवे किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसान सोमवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करेंगे। शनिवार को अपर जिलाधिकारी को पत्र देकर इस संबंध में सूचना दी गई।

संघर्ष समिति के सचिव चौधरी विदेश मलिक ने बताया कि दिल्ली-देहरादून हाईवे गोगवान, चूनसा, बंतीखेड़, लांक, माजरा, भाजू, बंतीखेड़ा, बाबरी, भैंसानी, खानपुर, बुटराड़ा, लाडू माजरी आदि 20 से अधिक गांवों से होकर जाएगा। जिले में खेती की जमीन का सर्किल रेट करीब छह साल से बढ़ा नहीं है। भूमि अधिग्रहण पर सर्किल रेट का चार गुणा मुआवजा का मिलता है, लेकिन वह कम है।

काफी किसानों ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्तियां भी दर्ज की थी, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अभी तक डीपीआर भी नहीं दिखाई गई है। ऐसे में किसानों को नहीं पता है कि कहां पर सिचाई के लिए नाली होगी और कहां पर अंडरपास होगा। ट्यूबवैल और पेड़ आदि हाईवे में आएंगे तो उनका मुआवजा कैसे और कितना मिलेगा। उक्त सभी मुद्दों को लेकर कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

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