नाना नानी पाल रहे दो मासूम अनाथ, योजना का नहीं मिल रहा साथ

रेती के दो बच्चों को मदद की दरकार है। उनके मां बाप की मौत हो चुकी है। बेरोजगार बूढ़े नाना नानी के कंधों पर परवरिश का बोझ है। विडंबना यह है कि बच्चों के पास मां बाप के कोविड से मौत का कोई प्रमाण पत्र नही है इस कारण मुख्यमंत्री सेवा योजना के तहत भी बच्चों को लाभान्वित नहीं किया जा सकता। जबकि दोनों अनाथ बच्चे पात्र है। अधिकारी भी उनके सरंक्षण व देखभाल के लिए योजना से लाभान्वित किए जाने को जरूरी मान रहे हैं।

JagranTue, 15 Jun 2021 02:45 AM (IST)
नाना नानी पाल रहे दो मासूम अनाथ, योजना का नहीं मिल रहा साथ

जेएनएन, शाहजहांपुर: रेती के दो बच्चों को मदद की दरकार है। उनके मां, बाप की मौत हो चुकी है। बेरोजगार बूढ़े नाना नानी के कंधों पर परवरिश का बोझ है। विडंबना यह है कि बच्चों के पास मां बाप के कोविड से मौत का कोई प्रमाण पत्र नही है, इस कारण मुख्यमंत्री सेवा योजना के तहत भी बच्चों को लाभान्वित नहीं किया जा सकता। जबकि दोनों अनाथ बच्चे पात्र है। अधिकारी भी उनके सरंक्षण व देखभाल के लिए योजना से लाभान्वित किए जाने को जरूरी मान रहे हैं। चाइल्ड लाइन और तहसील प्रशासन ने खाद्यान्न की तो व्यवस्था करा दी है, लेकिन अन्य योजनाओं का लाभ मुश्किल है।

जनपद में 25 बच्चे अनाथ व बेहसरा के रूप में दर्ज हुए है। इनमें रेती के दो अनाथ बच्चों की कहानी बेहद करूणा भरी है। दरअसल बच्चों के मजदूर पिता की पांच माह पूर्व मौत हो गई। इससे रोजी रोटी का भी जरिया खत्म हो गया। मां ने बच्चों की परवरिश के लिए घरों में चौका बर्तन शुरू कर दिया। लेकिन नियति को कुछ और नहीं मंजूर था। अप्रैल माह में बच्चों के सिर से मां का साया भी दूर हो गया और दोनों पूरी तरह अनाथ हो गए। अस्पताल गेट पर थम गई सांस, बच्चों की मदद की भी टूटी आस

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से बच्चों की परवरिश की उम्मीद बंधी थी। लेकिन कोविड जांच रिपोर्ट न होने पर दोनों पात्र बच्चे योजना के लाभ से वंचित है। डबाडबाई आंखों से बच्चों के बूढे नाना ने बताया कि उनकी बेटी को खांसी आ रही थी। सांस लेना भी मुश्किल था। बड़ी मुश्किल से अस्पताल ले गए। लेकिन उपचार से पहले ही अस्पताल के गेट पर सांसे थम गई। कोविड जांच भी नही हो सकी। इस कारण लाभ भी मुश्किल है। चाइल्ड लाइन ने मुहैया कराया जरूरी सामान, प्रशासन ने कराई राशन की व्यवस्था

चाइल्ड लाइन ने दोनों बच्चों की मदद के लिए उनके नानी नानी को राशन मुहैया कराया। तहसील प्रशासन ने भी कोटेदार के माध्यम से नियमित राशन की व्यवस्था करा दी है। लेकिन मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के लाभ की औपचारिकता पूर्ण न होने पर असमर्थता जताई गई है। मुख्यमंत्री बाल सेवा येाजना का उन्हीं बच्चों को लाभ मिलेगा, जिन बच्चों के माता पिता की कोविड संक्रमण से मौत हुई है। शेष अनाथ व बेहसरा बच्चों को अन्य योजनाओं के तहत लाभ दिलाया जाएगा। स्पांसरशिप प्रोग्राम के तहत बच्चों को लाभान्वित कराने का प्रयास किया जाएगा।

गौरव मिश्रा, जिला प्राबेशन अधिकारी

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