हर दो साल में नई गन्ना प्रजाति विकसित करें वैज्ञानिक

संसदीय कार्य चिकित्सा शिक्षा एवं वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने हर दो साल में नई प्रजाति विकसित करने का आह्वान किया।

JagranWed, 23 Oct 2019 06:26 PM (IST)
हर दो साल में नई गन्ना प्रजाति विकसित करें वैज्ञानिक

जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर : संसदीय कार्य, चिकित्सा शिक्षा एवं वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा किसानों की खुशहाली व देश की तरक्की के लिए गन्ना शोध संस्थान हर दो साल में नई गन्ना प्रजाति विकसित करें। इसके लिए बजट की कमी नहीं आने दी जाएगी।

वह बुधवार को उप्र. गन्ना शोध परिषद में नवीन प्रयोगशाला भवन के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। गन्ना एवं सिचाई मंत्री सुरेश राणा के साथ खन्ना ने प्रयोगशालाओं का निरीक्षण भी किया। टिश्यू कल्चर प्रयोगशाला में विकसित व संरक्षित की जा रही नई गन्ना किस्मों को भी मंत्री द्वय ने देखा। इसके बाद शर्करा रसायन, दैहिकी, प्रसार, बीज उत्पादन आदि प्रयोगशालाओं को भी देखा। गन्ना व सिचाई मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि वैज्ञानिकों की बदौलत ही उत्तर प्रदेश चीनी उत्पादन, रिकवरी व उपज दर में देश में नंबन वन पर पहुंचा है।

प्रमुख सचिव गन्ना विकास व चीनी उद्योग तथा आबकारी संजय आर भूसरेड्डी ने कहा सीओ 0238 गन्ना किस्म को लाल सड़न रोग से बचाने के लिए तीन नई गन्ना प्रजातियों को रिलीज किया गया है।

यूपीसीएसआर निदेशक डा. जे सिंह ने परिषद की प्रगति पर प्रकाश डाला। ददरौल विधायक मानवेंद्र सिंह, पुवांया चेतराम, डीसीबी चेयरमैन डीपीएस राठौर, पूर्व जिपंअ विरेंद्र यादव, जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह, एसपी डॉ. एस चिनप्पा, नगर आयुक्त विद्या शंकर सिंह, गन्ना उपायुक्त राजीव राय, डीसीओ शाहजहांपुर डॉ. खुशीराम,

डीसीओ बरेली पीएन सिंह, डीसीओ पीलीभीत जितेंद्र मिश्रा, डीसीओ बदायूं राम किशन, तिलहर चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक शेर बहादुर सिंह, निगोही चीनी मिल के अधिशासी अध्यक्ष कुलदीप सिंह, जीएम केन आशीष त्रिपाठी, पुवायां जीएम कमल रस्तोगी, मकसूदापुर जीएम एके वाजपेयी, यूपीसीएसआर अपर निदेशक डॉ. बीएल शर्मा, डॉ. अनिल सिंह, डॉ. प्रताप सिंह, डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. एसपी सिंह, डॉ. विनय श्रीवास्तव आदि मौजूद थे। संचालन डॉ. सुरेश मिश्रा ने

किया।

प्रमुख सचिव ने सुबह किया गन्ना फार्म का निरीक्षण

मंगलवार रात आए प्रमुख सचिव संजय आर भूसरेड्डी ने लोकार्पण से पूर्व गन्ना फार्म व लैब का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों के शोध कार्य भी देखे। उन्हें अंत:फसली खेती के मॉडल व गुणवत्तायुक्त गन्ना प्रजाति के विकास को प्रेरित किया।

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