कलान प्रकरण में अधिकारियों पर गाज, अन्य आरोपित अब भी पकड़ से बाहर

रफियाबाद कलान के ग्राम निधि घोटाला में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार डीपीआरओ समेत दो कार्मिकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। दो कार्मिक जेल भी भेजे जा चुके हैं। पंचायत सचिव का तबादला हो चुका है लेकिन अन्य नामजद अब भी पकड़ से बाहर हैं

JagranThu, 28 Oct 2021 01:21 AM (IST)
कलान प्रकरण में अधिकारियों पर गाज, अन्य आरोपित अब भी पकड़ से बाहर

जेएनएन, शाहजहांपुर : रफियाबाद कलान के ग्राम निधि घोटाला में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार डीपीआरओ समेत दो कार्मिकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। दो कार्मिक जेल भी भेजे जा चुके हैं। पंचायत सचिव का तबादला हो चुका है, लेकिन अन्य नामजद अब भी पकड़ से बाहर हैं।

गत वर्ष सितंबर माह में नगर पंचायत बन चुकी रफियाबाद कलान के ग्राम निधि के बंद खाते से 11 और 12 अगस्त को 15.77 लाख रुपये का फर्जी भुगतान कर दिया गया। भारत परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह की शिकायत पर शासन स्तर से जांच हुई। उप निदेशक पंचायतीराज की जांच के बाद जिला पंचायती राज अधिकारी पवन कुमार ने कलान की ब्लाक प्रमुख रुचि वर्मा, उनके पति राहुल वर्मा, अरुण निगम, धनराज पटेल, एडीपीएम देवीलाल मौर्य, कम्प्यूटर आपरेटर केशरीनंदन, फर्म स्वामी पंकज गुप्ता, संजीव कुमार, राहुल वर्मा, गुड्डू, पीयूष गुप्ता के खिलाफ रिपोर्ट कलान थाने में मुकदमा दर्ज कराया। केशरीनंदन, एडीपीएम देवीलाल मौर्य गिरफ्तार कर जेल भेजे जा चुके हैं। एडीओ प्रेमसागर यादव स्थानांतरित करने के साथ ही तत्कालीन एडीओ धनराज पटेल व डीपीआरओ पवन कुमार को भी मामले में दोषी मानते हुए निलंबित किया जा चुका है। ब्लाक प्रमुख व निलंबित सचिव का डोंगल लगाकर हुआ भुगतान

नवंबर 2020 में कलान को नगर पंचायत घोषित किया। इसके बाद रफियाबाद कलान के ग्राम निधि खाते में अवशेष धनराशि की निकासी पर रोक लगा दी गई। लेकिन ब्लाक प्रमुख रुचि वर्मा व निलंबित पंचायत सचिव के डोंगल को सक्रिय कराकर 11 व 12 अगस्त 2021 को ई-स्वराज पोर्टल के माध्यम से 15 लाख 77 हजार 963 रुपये निकाल लिए गए। धनराशि रुचि वर्मा के पति राहुल वर्मा, पंकज वर्मा व अन्य के खाते में भेजी गई। पुलिस अभी तक सरकारी कार्मिकों को ही दोषी मान रही है। जिनके खाते में अवैध रूप से पैसा भेजा गया उन्हें क्लीन चिट देने के प्रयास हो रहे हैं।

कलान ग्राम निधि खाते से निकाली गई धनराशि मामले में विभागीय कार्मिक मुख्य रूप से दोषी है। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई हुई है। जिनके खाते में पैसा भेजा गया, उनका खास दोष नहीं है। उन्होंने तो अपना पैसा मांगा। लेकिन विभाग ने गलत तरीके से दिया। इस कारण अभी गिरफ्तार नहीं किया जा रहा। विभाग से काम कराए जाने के साक्ष्य मांगे गए है। यदि काम नहीं पाया गया तो दोषी माना जाएगा।

धर्मेंद्र कुमार, थानाध्यक्ष कलान

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