शाहजहांपुर में बहुमूल्य जमीन पर लगाया आरओ सिस्टम, लोगों को पानी देना भूल गए

गत वर्ष गांधी जयंती पर लोगों को रेल नीर बिस्लरी सरीखे ब्रांड की गुणवत्ता की तरह के शुद्ध जल सस्ते में मुहैया कराने का सपना दिखाया गया। इसके लिए दिल्ली की संस्था ने नगर निगम की बहुमूल्य जमीन पर लाखों की लागत से सेल्फ सस्टेनेबेबल वाटर प्यूरीफिकेशन स्टेशन (ड्रिकिग वाटर क्लीनिक) की स्थापना भी की

JagranTue, 28 Sep 2021 12:21 AM (IST)
शाहजहांपुर में बहुमूल्य जमीन पर लगाया आरओ सिस्टम, लोगों को पानी देना भूल गए

जेएनएन, शाहजहांपुर : गत वर्ष गांधी जयंती पर लोगों को रेल नीर, बिस्लरी सरीखे ब्रांड की गुणवत्ता की तरह के शुद्ध जल सस्ते में मुहैया कराने का सपना दिखाया गया। इसके लिए दिल्ली की संस्था ने नगर निगम की बहुमूल्य जमीन पर लाखों की लागत से सेल्फ सस्टेनेबेबल वाटर प्यूरीफिकेशन स्टेशन (ड्रिकिग वाटर क्लीनिक) की स्थापना भी की। जलापूर्ति के लिए पांच हजार लीटर प्रति घंटा जल शोधन क्षमता वाला अत्याधुनिक आरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) लगाया गया। गत वर्ष दो अक्टूबर को वित्त एवं चिकित्सा शिक्षा व संसदीय कार्यमंत्री ने स्टेशन का लोकार्पण कर जलापूर्ति का शुभारंभ किया। लेकिन दूसरे ही दिन से लोगों की सपना टूट गया। साल भर बाद भी आरओ वाटर की आपूर्ति बाधित है। फुटकर में दो रुपये लीटर की दर से पानी मुहैया कराने का किया था वादा

ब्रेस फाउंडेशन भारत सेवाश्रम संघ तथा नगर निगम के संयुक्त सहयोग से निर्मित आरओ वाटर स्टेशन पर आमजन को दो रुपये प्रति लीटर की दर से उच्च गुणवत्ता वाला शुद्ध जल मुहैया कराने की घोषणा की गई थी। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने भी अत्याुधिनक पेयजल सयंत्र को नगर के लिए बड़ी उपलब्धि बताया था। कालांतर में इस तरह की क्लीनिक स्टेशन को शहर के अन्य क्षेत्रों में लगाकर सुस्वास्थ्य के साथ रोजगार की भी उम्मीद जताई गई थी। यह किया था कार्यदायी संस्था प्रमुख ने दावा

ब्रेस फाउंडेशेन भारत सेवाश्रम संघ की प्रोजेक्ट कोआर्डनिटर अताशी चटर्जी ने लोकार्पण के दौरान दिल्ली से प्रोजेक्ट की जानकारी दी थी। बताया था कि नारी सशक्तिकरण, स्वावलंबन, स्वास्थ्य व जल संरक्षण को ध्यान में रखकर ड्रिकिग वाटर क्लीनिक स्टेशन की शुरुआत की गई है। उन्होंने स्टेशन पर स्वास्थ्य सेवा सुविधा भी शुरू किए जाने का दावा किया था। सोमवार को यह था नजारा

सोमवार को सेल्फ सस्टेनेबल वाटर प्यूरीफिकेशन बंद था। फोटो खींचने पर सड़क के दूसरी ओर खोखे पर चाय बेंचने वाला आया। उसने खुद को स्टेशन संचालक बताया, दावा किया कि रोज स्टेशन खुलता है। ताला खोलने पर अंदर जाला लगा था। कोने में कुल्हड़ व एक कुर्सी पर बैग में चाय की पत्ती, नमकीन, तथा पानी की बोतल रखी थी। नितिन ने आरओ चलाकर दिखाया। लेकिन पानी किस समय दिया जाता है, कौन लेकर जाता है, इस सवाल का कोई जवाब नहीं सका। आधा टैंक भी भरा था, जिसके पानी का स्वाद काफी खराब था। तीन दिन बाद भी जवाब नहीं दे सके

कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार यहां ब्रेस फाउंडेशन भारत सेवाश्रम संघ का कार्य देखने वाले अमिताभ चटर्जी से ड्रिकिग वाटर क्लीनिक स्टेशन के बंद होने का कारण जानने की कोशिश की गई। तीन दिन तक संपर्क के बाद भी जवाब नहीं दे सके। वाट्सएप पर मैसेज भेजने पर उन्होंने मीडिया टीम को सवाल फारवर्ड करने की जानकारी देकर इतिश्री कर ली। अतासी चटर्जी ने भी काल रिसीव नहीं की। स्टेशन पर कोई पानी ही लेने नहीं आता। इसलिए सुबह शाम ताला खोलता हूं। महीनों में दो चार केन पानी बिकता है। मुझे अभी तक कोई पगार भी नही मिली।

नितिन नगर निगम ने दिल्ली की संस्था को ड्रिकिग वाटर क्लीनिक की स्थापना के लिए सिर्फ जमीन मुहैया कराई। कोई बजट नहीं दिया। स्टेशन से आरओ वाटर की जलापूर्ति क्यों नहीं की जा रही है इसके लिए संस्था को नोटिस जारी कर जवाब मांगा जाएगा।

संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त

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