शाहजहांपुर में कोरोना पर विजय पाकर डिप्टी कलक्टर के बाद आइआरएस बनी दिव्यांशी

दृढ़ निश्चय कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच से शाहजहांपुर की बेटी दिव्यांशी सिंह ने जनपद के साथ नारी शक्ति का मान बढ़ा दिया है। पीसीएस परीक्षा में 34वीं रैंक के साथ डिप्टी कलेक्टर बनी जाबांज बेटी ने अब संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 726वीं रैंक के साथ भारतीय राजस्व सेवा आयकर के लिए नाम सुरक्षित कर लिया है। दिव्यांशी सिंह ने लक्ष्य प्राप्ति के लिए कोरोना संक्रमित होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी।

JagranSun, 26 Sep 2021 12:33 AM (IST)
शाहजहांपुर में कोरोना पर विजय पाकर डिप्टी कलक्टर के बाद आइआरएस बनी दिव्यांशी

जेएनएन, शाहजहांपुर : दृढ़ निश्चय, कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच से शाहजहांपुर की बेटी दिव्यांशी सिंह ने जनपद के साथ नारी शक्ति का मान बढ़ा दिया है। पीसीएस परीक्षा में 34वीं रैंक के साथ डिप्टी कलेक्टर बनी जाबांज बेटी ने अब संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 726वीं रैंक के साथ भारतीय राजस्व सेवा आयकर के लिए नाम सुरक्षित कर लिया है। दिव्यांशी सिंह ने लक्ष्य प्राप्ति के लिए कोरोना संक्रमित होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। कोरोना संक्रमण के दौरान दिल्ली में रहकर तैयारी की। नतीजतन दिव्यांशी ने सफलता के शिखर पर ध्वज फहरा दिया।

भावलखेड़ा विकास खंड के गांव रौरा निवासी अधिवक्ता राजीव कुमार सिंह तथा रिलायंस टाउनशिप में ब्यूटी पार्लर शाप चलाने वाले कल्पना सिंह ने बड़ी बेटी दिव्यांशी सिंह को आइएएस तथा छोटी बेटी को जज बनाने का सपना संजोया है। इसके लिए उन्होंने दिव्यांशी दोनों बेटियों का शहर के सेंटपाल स्कूल में प्रवेश दिलाया। दिव्यांशी सिह ने इंटरमीडिएट के बाद सिविल इंजीनियरिग से बीटेक किया। माता पिता के साथ खुद का सपना पूरा करने के लिए संघ लोकसेवा आयोग के लिए प्रयास शुरू कर दिए। तीसरी बार में ही उन्होंने कुल चयनित 763 मेधावियों में 726वां स्थान प्राप्त कर भारतीय राजस्व विभाग आयकर के लिए स्थान सुरक्षित कर लिया है। पीसीएस परीक्षा 2020 में दिव्यांशी सिंह डिप्टी कलक्टर के चयनित की गई है।

ब्यूटी पार्लर की दुकान चलाने वाली मां से मिली मेहनत की प्रेरणा

रौरा निवासी राजीव कुमार सिंह के पिता अमर सिंह गौड़ शाहजहांपुर में स्टेशन अधीक्षक रहे है। वह भी दिव्यांशी सिंह की कुशाग्र बुद्धि को देख आइएएस बनाना चाहते थे। लेकिन घर के कामकाज के बाद ब्यूटी पार्लर का संचालन करने वाली आत्मनिर्भर मां कल्पना सिंह की मेहनत से दिव्यांशी को विशेष प्रेरणा मिली। मौसा दिनेश सिंह व भाई तुषार सिंह ने भी दिव्यांशी सिंह को प्रोत्साहित किया। दिव्यांशी की सफलता से विधि स्नातक की पढ़ाई कर रही छोटी बहन वैशाली सिंह भी बेहद प्रभावित है। उन्होंने भी जज बनने का संकल्प लिया है।

कोरोना काल में खुद खाना बनाकर की पढ़ाई, संक्रमण के बाद भी नहीं हारी हिम्मत

दिव्यांशी ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता के लिए कोरोना की भी परवाह नही की। गत वर्ष कोरोना काल में जब लोग घर लौट रहे थे, तब दिव्यांशी पढ़ाई के लिए दिल्ली में रही। इस वर्ष 13 अप्रैल में दिव्यांशी कोरोना संक्रमित हो गई। 26 अप्रैल को यूपीएससी का साक्षात्कार था। दिव्यांशी ने माता पिता को दिल्ली आने के लिए मना कर दिया। खुद के बूते खाना बनाकर कोरोना से जंग जारी रखी। साक्षात्कार की तिथि बढ़ाने के लिए यूपीएससी को मेल भेजा। लेकिन आयोग ने परीक्षा की ही तिथि बढ़ा दी। तीन अगस्त को साक्षात्कार के बाद दिव्यांशी सिंह ने सफलता के शिखर पर मेधा व मेहनत से ध्वज फहरा दिया।

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