बाहर से आने वाले कामगारों को छह स्थानों किया जाएगा क्वारंटाइन

बाहर से आने वाले कामगारों को छह स्थानों किया जाएगा क्वारंटाइन

संतकबीर नगर महानगरों से जिले में वापस आने वाले कामगारों को क्वारंटाइन करने के लिए छह स्थानों पर व्यवस्था की गई है।

JagranTue, 20 Apr 2021 11:38 PM (IST)

संतकबीर नगर : महानगरों से जिले में वापस आने वाले कामगारों को क्वारंटाइन करने के लिए छह स्थानों पर व्यवस्था की गई है। मंगलवार को जिलाधिकारी दिव्या मित्तल व पुलिस अधीक्षक डा. कौस्तुभ ने प्रस्तावित स्थलों का निरीक्षण किया। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को क्वारंटाइन केंद्रों को सैनिटाइज करवाकर तैयार करने का निर्देश दिया गया। कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए दूसरे प्रदेशों से आने वाले प्रवासी कामगारों को मजदूरों को 14 दिनों तक क्वारंटाइन (एकांतवास में रहने) करने के लिए जनपद में छह क्वारंटाइन केंद्र बनाए गए हैं। केंद्रों का निरीक्षण करने के दौरान डीएम ने प्रभारी सीएमओ डा. मोहन झा को इन केंद्रों को सैनिटाइज करवाकर तैयार करवाने को कहा। किसी प्रकार की अव्यवस्था होने पर उन्होंने जिम्मेदारों पर कार्रवाई की चेतावनी दी। यहां रहने वाले कामगारों के भोजन व नियमित स्वास्थ्य के नियमित जांच की भी व्यवस्था रहेगी। ------------------ यहां एकांतवास में रहेंगे प्रवासी इसमें बालूशासन के महामाया पालीटेक्निक विद्यालय, आइटीआइ भुजैनी, चौधरी रिजार्ट कांटे, राज ग्लोबल एकेडमी निकट नवीन मंड़ी स्थल खलीलाबाद, सेंट थामस स्कूल नेदुला चौराहा व औद्योगिक क्षेत्र स्थित ब्लूमिग बड्स स्कूल शामिल हैं।

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जीवन रक्षा पहला धर्म, घर में रहकर ही कीजिए पूजा

संतकबीर नगर: भारत से टकराने वाले को हमेशा हार का सामना करना पड़ा है, चाहे बीमारी हो या व्यक्ति। कोरोना भी खत्म होगा, इसमें कोई संशय नहीं। समय की मांग है कि यह बीमारी फैलने न पाए इसके लिए सभी को सावधानी बरतनी चाहिए। कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। हम सावधानी अपनाकर ही इससे बचाव कर सकते हैं। नवरात्र देवी भगवती की पूजा का समय है। मां हर जगह है, उनकी कृपा सभी पर समान रूप से पड़ती है। वर्तमान परिस्थिति में घर पर रहकर ही हवन-पूजन व अन्य अनुष्ठान करें। घर को मंदिर मानकर पूजा करें। मंदिर जाने से परहेज करें। हवन के समय भीड़ न एकत्र करें। मां पुकार सुनेगी और मनोकामना पूरी होगी। हम सभी ने घर पर रहकर आराधना कर रहे हैं। आप भी स्थिति को समझें। यही सबसे बड़ी पूजा होगी। हम स्वयं व औरों का बचाव करके और मानवता की रक्षा करने में समर्थ हो सकेंगे।

-आचार्य डा. हरिद्वारा शुक्ल, प्राचार्य, श्रीसांग्वेद संस्कृत महाविदयालय तामेश्वरनाथ, खलीलाबाद

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