एसओजी की रडार पर आए नकली डीजल बनाने वाले, दो गिरफ्तार

जेएनएन बहजोई एसओजी के द्वारा धनारी पुलिस के साथ कस्बा भकरौली में छापेमारी की गई जहां पर दो लोगों को नकली डीजल के साथ गिरफ्तार किया है। जिनके पास से नकली डीजल बनाने से संबंधित पेट्रोलियम पदार्थ और अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं। एसओजी पुलिस के मुताबिक नकली डीजल बनाने का खेल करीब दो साल से चल रहा था।

JagranThu, 28 Oct 2021 11:48 PM (IST)
एसओजी की रडार पर आए नकली डीजल बनाने वाले, दो गिरफ्तार

जेएनएन, बहजोई: एसओजी के द्वारा धनारी पुलिस के साथ कस्बा भकरौली में छापेमारी की गई, जहां पर दो लोगों को नकली डीजल के साथ गिरफ्तार किया है। जिनके पास से नकली डीजल बनाने से संबंधित पेट्रोलियम पदार्थ और अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं। एसओजी पुलिस के मुताबिक नकली डीजल बनाने का खेल करीब दो साल से चल रहा था।

जिले की एसओजी और सर्विलांस टीम को पिछले कई दिनों से अलग-अलग स्थानों पर नकली डीजल की सप्लाई करने की सूचना मिल रही थी। जिन स्थानों पर डीजल की सप्लाई की जा रही थी। उसी के आधार पर मुखबिरी करते हुए एसओजी प्रभारी मनोज वर्मा, सर्विलांस प्रभारी बिजेंद्र मलिक और धनारी थाना की प्रभारी मुकेश कुमार सिंह ने गुरुवार की दोपहर बाद कस्बा भकरौली में औचक छापेमारी की। जहां उनके घर से विजेंद्र कुमार और मुंशी सिंह को गिरफ्तार कर लिया। मौके से 1740 लीटर के छह ड्रम नकली डीजल को बरामद किया। इसके अलावा अपमिश्रित पेट्रोलियम पदार्थ एक कार, एक टेंपो, एक मोपेड के अलावा छह खाली ड्रम, 13 खाली केन और डीजल पेट्रोल मोबिल आयल बनाने के सामान भी बरामद किए हैं। पुलिस की छापेमारी के बाद इसकी सूचना तत्काल आपूर्ति विभाग को दी गई। जिसके बाद गुन्नौर की पूर्ति निरीक्षक कुलदीप जैन और सतराज सिंह ने नकली डीजल के जांच का नमूना लेकर लैब को भेज दिया है और विभागीय कार्रवाई भी करनी शुरू कर दी है। दो साल से चल रहे काले कारोबार की पुलिस को नहीं लगी भनक

पुलिस के मुताबिक नकली डीजल, पेट्रोल और मोबिल आयल बनाने कि यह धंधेबाज इनकी आपूर्ति अलग-अलग स्थानों से अलग-अलग एजेंट के जरिए करते थे। नकली डीजल और पेट्रोल पकड़ में नहीं आए इसके लिए ग्रामीण इलाकों से सस्ती दरों पर डीजल खरीदने वाले लोगों से संपर्क रहता था जो कि लिक मार्ग पर उन स्थानों पर डीजल पेट्रोल की बिक्री करते हैं। जहां पर पेट्रोल पंप या फुटकर डीजल या पेट्रोल विक्रेता की उपस्थिति कम है। दोनों करीब दो साल से अधिक समय से इस काले कारोबार को अंजाम दे रहे थे। जिसकी भनक स्थानीय पुलिस को नहीं लग रही थी। हालांकि इसकी बरामदगी छापेमारी के दौरान नहीं की गई है लेकिन पुलिस इसके लिक तलाश रही है। अभी भी एसओजी और धनारी पुलिस को उन लोगों की तलाश है। जिनके जरिए से नकली डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति अलग-अलग शहरी और ग्रामीण स्थानों पर की जा रही थी। 80 से 90 रुपये प्रति लीटर होती थी सप्लाई

पुलिस के मुताबिक नकली डीजल बनाने वाले धंधेबाज कई प्रकार के रसायन और ज्वलनशील पदार्थ का प्रयोग कर पेट्रोल और डीजल को तैयार कर लेते थे। उसके बाद उसे 20 लीटर की कैन में भरकर तैयार करते थे जिसे 80 से 90 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बेचा जाता था। ग्रामीण इलाकों में फुटकर रूप में बेचने वाले लोग इसे करीब 120 से 140 रुपये प्रति लीटर मौके के हिसाब से विक्रय करते हैं। बड़ी बात यह है कि ग्रामीण इलाकों में जब आपात स्थिति में पेट्रोल या डीजल नहीं मिलते हैं तो मजबूरी में खरीदने वाले वाहन चालक इसकी गुणवत्ता या शुद्धता की परख नहीं कर पाते।

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