कोरोना से जंग में बढ़ाइये स्वास्थ्य महकमे की रफ्तार

कोरोना से जंग में बढ़ाइये स्वास्थ्य महकमे की रफ्तार

कोरोना के कहर के आगे सिस्टम की सभी व्यवस्थाएं धड़ाम होने के कगार पर हैं। आक्सीजन नहीं मिल रही है। दवाओं की कमी शुरू हो गई है।

JagranFri, 23 Apr 2021 11:26 PM (IST)

सहारनपुर, जेएनएन। कोरोना के कहर के आगे सिस्टम की सभी व्यवस्थाएं धड़ाम होने के कगार पर हैं। आक्सीजन नहीं मिल रही है। दवाओं की कमी शुरू हो गई है। वेंटीलेटर कम पड़ चुके हैं। सरकारी तंत्र हाफ रहा है, क्योंकि उनकी व्यवस्थाएं वेंटीलेटर पर आ चुकी हैं। जिले में चार कोविड अस्पताल वर्तमान में चल रहे हैं, लेकिन यहां पर हालात खराब हैं। प्राइवेट अस्पताल हो या फिर सरकारी, सभी जगह मरीजों को भटकना पड़ रहा है। जबकि सीएमओ हों या फिर मेडिकल कालेज के प्राचार्य, सभी दावा ठोक रहे हैं कि उनके यहां कोई व्यवस्था नहीं गड़बड़ा रही है। सबकुछ ठीक चल रहा है। यह है कोविड-19 अस्पतालों का हाल

मेडिकल कालेज पिलखनी में 60 वेंटीलेटर बेड हैं, जिसमें से लगभग 58 मरीज वेंटीलेटर बेड पर हैं। इसी तरह से कुल बेड की संख्या 303 है, जबकि कुल मरीजों की संख्या 227 है। आक्सीजन की कमी वैसे तो नहीं बताई जा रही, लेकिन मरीजों को बोला जा रहा है कि वह आक्सीजन की खुद व्यवस्था कर लें। इसी तरह से फतेहपुर सीएचसी में 50 बेड की व्यवस्था है। वेंटीलेटर एक भी नहीं है, जबकि यहां पर 28 के करीब मरीज भर्ती हैं। वहीं, ग्लोकल मेडिकल कालेज में 400 बेड की व्यवस्था है। यहां पर अभी तक उपचार ही शुरू नहीं हुआ है। मात्र पांच वेंटीलेटर हैं। वी-ब्रास में 60 बेड है। 10 वेंटीलेटर हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यह कोविड अस्पताल कम पड़ सकते हैं और व्यवस्था अधिक बिगड़ सकती है। इन सभी अस्पतालों का दावा है कि आक्सीजन की कमी नहीं है, लेकिन मरीजों को मिल नहीं रही है। जिला अस्पताल में क्यों नहीं उपचार, वेंटीलेटर क्यों बंद कर रखे

जिला अस्पताल के एक वार्ड को कोविड वार्ड बनाया हुआ है। यहां पर केवल संदिग्ध मरीजों को रखा जा रहा है। पाजिटिव आते ही मरीजों को मेडिकल कालेज या फिर अन्य कोविड अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है, जबकि यहां पर नौ वेंटीलेटर धूल फांक रहे हैं। हालाकि सीएमओ का डा. बीएस सोढ़ी का कहना है कि यह आइसोलेशन वार्ड है। यहां पर कोविड मरीजों का उपचार नहीं करने का उच्चाधिकारियों का आदेश है। बड़ा सवाल यह है कि ऐसा आदेश क्यों दिया गया है। महामारी में जबकि मौतों की लाइन लगी है, जिला अस्पताल को सहेजने का आशय क्या है, क्यों यहां के संसाधनों का प्रयोग किया नहीं जा रहा है। वेटीलेटर क्यों बंद कर रखे हैं।

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दवाएं और आक्सीमीटर अधिक दामों पर बिक रहे

दैनिक जागरण की टीम ने शुक्रवार को पांच मेडिकल स्टोर पर पहुंचकर दवाओं के बारे में पड़ताल की। जिला अस्पताल के सामने केवल एक स्टोर पर विटामीन-सी की गोलियां मिलीं। वहीं गिलोए की गोली, पैरासीटामोल, डोलो आदि दवाएं आसानी से मिल गईं। वहीं, एक मेडिकल स्टोर संचालक ने बताया कि आक्सीमीटर जो 500 से 700 रुपये में मिलता था, अब वह उसे 1500 से लेकर 2500 तक में बेच रहे हैं। उन्हें खुद ब्लैक में यह आक्सीमीटर मिल रहा है। ---इन्होंने कहा--

जिला अस्पताल में किसी भी दवाई की कमी नहीं है। न ही कोई दवाई ब्लैक में बिक रही है। निजी स्टोर संचालक यदि ब्लैक में दवाई बेच रहे हैं तो कार्रवाई होगी। बेड की कमी नहीं है। आक्सीजन की कमी चल रही है। वेंटीलेटर आने वाले समय में कम पड़ सकते हैं। अभी कम नहीं हैं।

-डा. बीएस सोढ़ी, सीएमओ

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