जानलेवा साबित हो रहे खुले ट्रांसफार्मर

प्रदेश सरकार जहां इस कोशिश में है कि कोई भी पशु छुट्टा घूमता न मिले वहीं दूसरी तरफ विभागों की लापरवाही से बेसहारा पशु निरंतर बेमौत मर रहे हैं।

JagranWed, 24 Nov 2021 11:11 PM (IST)
जानलेवा साबित हो रहे खुले ट्रांसफार्मर

सहारनपुर, जेएनएन। प्रदेश सरकार जहां इस कोशिश में है कि कोई भी पशु छुट्टा घूमता न मिले, वहीं दूसरी तरफ विभागों की लापरवाही से बेसहारा पशु निरंतर बेमौत मर रहे हैं।

बड़गांव में हाल में ही बिना तारबंदी के सड़क किनारे रखे ट्रांसफार्मर की चपेट में आने से एक गाय की मौत हो गई। यहीं नहीं जर्जर विद्युत तारों से आए दिन इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं लेकिन ऊर्जा निगम के अधिकारी हादसों पर रोक नहीं लगा पा रहे हैं। कई बार ग्रामीण भी ऐसे ट्रांसफार्मर की चपेट में आकर झुलस जाते हैं।

यह है ट्रांसफार्मरों की स्थिति

शहरी क्षेत्र में तो फिर भी तकरीबन 95 प्रतिशत ट्रांसफार्मर सड़कों किनारे न केवल चबूतरे बना तथा जाल लगाकर रखे गए हैं। वहीं, कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति इसके उलट है। जिले के 11 ब्लाक में सैकड़ों ऐसे गांव है जिनमें विद्युत ट्रांसफार्मर बिना चबूतरे व तार या जालबंदी के रखे हैं। हद तो यह है कि खेतों, मिट्टी के टीलों आदि पर खुले में ट्रांसफार्मर रख बिजली आपूर्ति शुरू कर दी जाती है जोकि पशुओं के साथ-साथ आमजन के लिए भी खतरनाक है। विद्युत विभाग के पास खुले में बिना तारबंदी के रखे ट्रांसफार्मर का रिकार्ड नहीं है, एक अनुमान के अनुसार जिले में करीब 283 ट्रांसफार्मर बिना तारबंदी के रखे है।

कस्बों व देहात में भरमार

बिना चबूतरा बनाए खुले में रखे ट्रांसफार्मरों की कस्बों व देहात में भरमार है। टपरी, नागल, देवबंद, सरसावा, नकुड़, चिलकाना, बेहट, मिर्जापुर, सहित अनेक गांवों में विद्युत ट्रांसफार्मर सड़कों व मुख्य मार्गों तथा खेतों में बिना जालबंदी के रखे है। तमाम क्षेत्रों के ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत विभाग के अधिकारियों से ट्रांसफार्मरों की जालबंदी करने की मांग सैकड़ों बार की जा चुकी है लेकिन आज दिन तक कोई समाधान नहीं हुआ है तथा पशु इनकी चपेट में आकर मरते रहे है।

ट्रांसफार्मर फुंकने से हो रहे हादसे

शहरी क्षेत्र में करीब 95 प्रतिशत ट्रांसफार्मर सड़कों के किनारे चबूतरे बना व जालबंदी कर रखे हुए है। इसके बावजूद ट्रांसफार्मर में आग लगने से कई बार बड़े हादसे होने से बचे है। कंबोह के पुल पर पिछले दिनों ट्रांसफार्मर में भीषण आग लगने से कई काष्ठकला के शो-रूम जलने से बचे थे। ऐसी ही स्थिति पुरानी मंडी, अंबाला रोड, घंटाघर, रायवाला, मंडी समिति रोड सहित अनेक क्षेत्रों की है। शहर में करीब 119 बड़े ट्रांसफार्मर लगे है जिनमें से अधिकांश में अक्सर आग लगने की घटनाएं होती रही है।

जर्जर विद्युत लाइनों बे-मौत मर रहे लोग

नगरीय क्षेत्र की करीब 167 नई कालोनियों से लेकर तमाम देहात क्षेत्र में जर्जर विद्युत तारों की भरमार है। जिनसे अक्सर हादसे होते रहे है। सहारनपुर के दिल्ली रोड, लेबर कालोनी रोड, मानकमऊ, चिलकाना रोड, बेहट रोड देहरादून व टपरी रोड पर नई विकसित कालोनी में बिजली के तार लटके पड़े है तथा हादसों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसी ही स्थिति देहात की है। बेहट, मिर्जापुर, में जर्जर विद्युत लाइनों से हादसे होते रहे है। जिले में पिछले 10 वर्षों में करीब 102 लोग विद्युत तारों की चपेट में आकर जान गवांने की जानकारी मिली है। गाय, घोड़े, सांड व बैल की भी करंट से मरने की संख्या सैकड़ों में है।

इनका कहना है...

बिना चबूतरे व जालबंदी के रखे ट्रांसफार्मर को चिह्नित किया जा रहा है। जर्जर विद्युत तार बदलने की प्रक्रिया चल रही है। हादसा न हो इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे है।

मो. असलम, अधीक्षण अभियंता ग्रामीण

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