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गुरु का स्थान सर्वोपरि : वासंतेय

जागरण संवाददाता, रामपुर : गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्री त्रिपुरेश्वरी शक्तिपीठ पीठ में हुए कार्यक्रम में साधकों ने गुरु पादुका पूजन किया। इस दौरान सभी श्रद्धालुओं ने मास्क लगाकर शारीरिक दूरी का पालन किया। मंदिर में साधकों की संख्या कम बनाए रखने के लिए, गुरु पूजन का लाइव टेलीकास्ट भी किया गया। अन्य दूसरे जिलों में रहने वाले साधकों ने लाइव टेलीकास्ट पर गुरु पादुका का पूजन कर गुरु आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान आचार्य राधेश्याम वासंतेय ने गुरु पूजन के महत्व के बारे में बताया कि गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु को उनके ज्ञान के कारण ईश्वर से भी ऊपर स्थान दिया गया है। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु पूजा करने से आत्मिक शांति मिलती है। यह दिन गुरु के प्रति कृतज्ञता दर्शाने का दिन है। जिस तरह सूर्य के ताप से तृप्त भूमि को वर्षा से शीतलता और फसल पैदा करने के लिए शक्ति प्राप्त होती है। इसी प्रकार गुरूचरण में उपस्थित साधकों को ज्ञान, शांति, भक्ति और योग शक्ति प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। गुरु भवरोग को दूर करने वाले वैद्य तो जीवनरूपी वाटिका को सुरभित करने वाले माली भी हैं। गुरु को विभिन्न रूपों ब्रह्मा, विष्णु, महेश्वर के रूप में भी स्वीकार किया गया है। गुरु को ब्रह्म भी माना गया है क्योंकि वह शिष्य को बनाता है एवं नव जन्म देता है। गुरु को विष्णु भी कहते हैं, क्योंकि वह अपने शिष्य का मनोबल बढ़ाता है। उसे इस संसार में गृहस्थ जीवन को पालन करने की कला सिखाता है तथा आध्यात्म की चेतना को साक्षात लेकर चलने की प्रेरणा देता है। गुरु को साक्षात महेश्वर भी माना है। उधर मिस्टन गंज स्थित अग्रवाल धर्मशाला में गुरु पूर्णिमा पर पंडित विश्वनाथ प्रसाद मिश्रा ने यज्ञ कर विधि-विधान से पूजन किया।

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