तहसीलों में नहीं बस अड्डे, सड़कों पर भटकते यात्री

तहसीलों में नहीं बस अड्डे, सड़कों पर भटकते यात्री

तहसीलों में नहीं बस अड्डे सड़कों पर भटकते यात्री

JagranWed, 08 Jul 2020 10:30 PM (IST)

जागरण संवाददाता, रामपुर : जिले की तहसीलों के लोगों को बाहर आवागमन के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। किसी भी तहसील में बस अड्डा नहीं होने के कारण यात्रियों को गर्मी हो, बारिश या फिर सर्दी, बसों का इंतजार सड़क पर खेड़े रह कर ही करना पड़ता है। तमाम मांग करने के बाद भी इनकी समस्या का समाधान होने का नाम नहीं ले रहा है।

नेशनल हाईवे पर बसे मिलक में बस स्टॉप नहीं है। फलस्वरूप गर्मियों के मौसम में तेज धूप में भी लोग बस की प्रतीक्षा में काफी-काफी देर नगर तीन बत्ती चौराहे पर खड़े रहते हैं। एक अरसे से यहां के लोग नगर में रोडवेज के बस स्टॉप की मांग कर रहे हैं। सत्ता पक्ष से जुड़े कई बड़े नाम यहां पर निवास करते हैं। कई सरकारें आई गईं। लेकिन, किसी ने भी इसको लेकर रुचि दिखाना मुनासिब नहीं समझा। नगर के व्यापारियों का भी कारोबार के सिलसिले में बाहर के शहरों में आना-जाना रहता है। इसके अलावा नौकरीपेशा लोगों के अलावा स्कूल, कॉलेज और कोचिग संस्थानों के लिए बरेली और रामपुर जाने वाले सैकड़ों स्टूडेंट्स रोज ही यहां से आवागमन करते हैं। इन सबको खुले आसमान के नीचे सड़क किनारे खड़े होकर बस की प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यह ही हाल बिलासपुर और शाहबाद का भी है। बिलासपुर में भी मुख्य चौराहे पर खड़े लोग बस की प्रतीक्षा करते देखे जा सकते हैं। वहीं शाहबाद होकर रामपुर और मुरादाबाद के लिए रोडवेज की बसें निकलती हैं। सुबह में बरेली के लिए बस जाती है। इनके इंतजार में यात्री खुले में ही खड़े रहते हैं। लोगों का कहना है कि सालों गुजर गए बस स्टॉप की मांग करते हुए। आज तक किसी ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। मिलक में भूमि का चयन

रोडवेज के एआरएम कपिल वाष्र्णेय का कहना है कि मिलक में बस स्टॉप के लिए रौरा कलां में भूमि चिह्नित कर ली गई है। मिलक प्रशासन की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। वहां से स्वीकृति होने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। शाहबाद में गैरआबादी वाली जमीन प्रशासन द्वारा बताई गई थी। उसके लिए विभाग की ओर से नगर के निकट जमीन की उपलब्धता करवाने के लिए लिखा गया था। जो अब तक नहीं हो सकी है। बिलासपुर में अस्पताल की जमीन प्रस्तावित की गई थी। जब हम देखने पहुंचे तो अस्पताल प्रशासन की ओर से आपत्ति लगा दी गई। उनका कहना था कि यहां ओपीडी चलती है। रोज सैकड़ों की संख्या में मरीज आते हैं। ऐसे में बस स्टॉप बनने से परेशानी खड़ी हो जाएगी। इन दोनों तहसीलों में जमीन मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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