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रामपुर में नवाबों के दौर में नहीं मना था पहला आजादी का जश्न

रामपुर में नवाबों के दौर में नहीं मना था पहला आजादी का जश्न
Publish Date:Fri, 14 Aug 2020 10:52 PM (IST) Author: Jagran

मुस्लेमीन, रामपुर : अंग्रेजों से आजादी मिलने के बाद 15 अगस्त, 1947 को देशभर में जश्न मना, लेकिन रामपुर में अलग ही हालात थे। यहा तब भी नवाबों का राज था और लोग आजादी की माग कर रहे थे। चार अगस्त को यहा थाने, तहसील और हाईकोर्ट में आग लगा दी गई थी। तब फौज ने आदोलनकारियों पर गोली चलाई जिसमें 12 लोग बलिदान हुए। रामपुर दो साल बाद वर्ष 1949 में आजाद हुआ था।

रामपुर का इतिहास लिखने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता शौकत अली खा कहते हैं कि रामपुर में 15 अगस्त, 1947 को लोग आजादी की मांग कर रहे थे, आंदोलन कर रहे थे। इससे पहले चार अगस्त को रामपुर में बवाल हुआ था। तब रजा अली खां यहां नवाब थे और वशीर हुसैन जैदी रामपुर रियासत के मुख्यमंत्री थे। नवाब रजा अली खा के बड़े बेटे मुर्तजा अली खा आर्मी चीफ थे। नवाब और उनके बेटे में भी कुछ अनबन रहती थी। इसको लेकर मुख्यमंत्री वशीर हुसैन जैदी ने कुछ लोगों को उकसा दिया और बवाल हो गया। लोगों ने कोर्ट, तहसील और मालखाना फूंक दिया था। 12 आंदोलनकारियों की मौत हुई और अनेक लोगों को जेल में बंद कर दिया गया था। 30 जून, 1949 को मिली थी आजादी

अधिवक्ता शौकत अली बताते हैं कि रामपुर में आजादी 30 जून, 1949 को मिली। इसके बाद रामपुर केंद्र सरकार के अधीन हो गया था। एक दिसंबर, 1949 को रामपुर उत्तर प्रदेश का जिला घोषित किया गया। पाकिस्तान में शामिल होना चाहते थे कुछ लोग

15 अगस्त, 1947 में जब देश आजाद हुआ तो यह खबर लोगों को रेडियो पर ही सुनने को मिली। हालांकि तब कुछ लोगों ने तो पाकिस्तान की हिमायत में भी नारे लगाए थे। ये लोग रामपुर रियासत को पाकिस्तान में शामिल कराना चाहते थे।

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