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नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ की आशंका

जागरण संवाददाता, स्वार : रामनगर बैराज से 13 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने से कोसी नदी उफान पर आ गई है। ऐसे में किसानों को पशुओं का चारा लेने के लिए जान जोखिम में डाल कर नदी पार करना पड़ रहा है। जलस्तर के बढ़ने से नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को चिता सताने लगी है।

शनिवार की रात उत्तराखंड के रामनगर बैराज से कोसी नदी में 13 हजार क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। जिसके बाद नदी उफान पर आ गई। ऐसे में लोगों के आगे पशुओं के चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। यहां पर बसे एक दर्जन से अधिक गांव के ग्रामीणों को हर वर्ष बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। लोगों को इससे बचाने के लिए लालपुर से मुंशीगंज तक 14 करोड़ की लागत से सरकार ने बांध का निर्माण करवाया था। बाढ़ आने पर बांध न कटे इसलिए लोक निर्माण विभाग द्वारा जगह-जगह बेरीकेडिग करवाई जाती है। वर्तमान में हालत यह है कि ध्यान न देने के कारण बांध कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं नदी में अवैध खनन के चलते धाराएं प्रभावित हो गई हैं। लोक निर्माण विभाग द्वारा मरम्मत के नाम पर हर वर्ष कागजी खानापूर्ति कर दी जाती है। इस बार अगर बाढ़ आई तो बांध पानी के बहाव को नहीं झेल पायेगा। जिसका खामियाजा नदी किनारे बसे फाजलपुर, जालफनगला, धनौरी, अंधापुरी, बंदरपुरा, मिलक काजी, सोनकपुर, समोदिया, रसूलपुर, फरीदपुर, खेमपुर व पसियापुरा के ग्रामीणों को भुगतना पड़ेगा।

एसडीएम राकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि बाढ़ से निपटने के लिए हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। अधिकारियों को निर्देश्दित कर बेरीकेडिग करवाई जाएगी।

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