24 दिन बाद फिर फूटा मोहित की मौत का ज्वालामुखी

24 दिन बाद फिर फूटा मोहित की मौत का ज्वालामुखी
Publish Date:Fri, 25 Sep 2020 12:07 AM (IST) Author: Jagran

रायबरेली : 30 अगस्त यानी रविवार की सुबह मोहित की जिला अस्पताल में मौत हुई थी। मृत्यु का कारण जानने के लिए पोस्टमॉर्टम कराया गया। बॉडी में चोट के निशान नहीं मिले। बिसरा सुरक्षित कर लिया गया। उस दिन सुबह 11 बजे से सोमवार की शाम पांच बजे तक अफरातफरी का माहौल रहा। कोतवाली में प्रदर्शन हुआ। रात में ही एसपी और डीएम लालगंज गए। कोतवाल और दो दारोगा निलंबित कर दिए गए। बड़ी मुश्किल से मोहित के घरवालों को ढूंढा गया। शहीद स्मारक पर अंतिम संस्कार कराने के बाद उसके परिवार को शहर में ही सुरक्षित स्थान पर रखा गया।

इस बीच पूर्व कप्तान स्वप्निल ममगाईं ने पुलिस में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों का एक दिन का वेतन यानी पांच लाख रुपये आर्थिक सहायता दिलाई। प्रशासन की ओर से भी पांच लाख की मदद दी गई। मोहित के भाई को ममगाईं ने पुलिस लाइंस में नौकरी दिला दी। ये भी भरोसा दिलाया कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कानूनी कार्रवाई तय है। हालांकि उनका ट्रांसफर हो गया। मामला भी शांत हो गया था। मगर, नए कप्तान श्लोक कुमार ने आते ही उस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। घटना के 24 दिन बाद एकाएक फिर मोहित की मौत का ज्वालामुखी फूट पड़ा, जब इस मामले में तत्कालीन कोतवाल, दो दारोगा और आरक्षियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। इस केस की चर्चा फिर शुरू हो गई कि अब इसमें आगे क्या होगा। जानकारों को ये भी पता है कि पोस्टमॉर्टम में चोट के निशान न मिलने के कारण इस केस में कोई जान नहीं बची है।

नेता भी आए आगे

इस घटना के तत्काल बाद सरेनी विधायक धीरेंद्र सिंह ने स्पष्ट कहा था कि अगर दोषियों पर कार्रवाई न हुई तो हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे। उधर, आप सांसद संजय सिंह भी मृतक मोहित के गांव पूरे बैजू मजरे बेहटा पहुंचे और उत्तर प्रदेश सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाए। कांग्रेसियों ने भी कोतवाली के गेट पर धरना प्रदर्शन किया था।

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