फिर मिले पगचिह्न, नहीं दिखी बाघिन

लखीमपुर पिछले कुछ दिनों से फूलबेहड़ और इसके आसपास इलाके में बाघिन की

JagranSun, 28 Nov 2021 11:59 PM (IST)
फिर मिले पगचिह्न, नहीं दिखी बाघिन

लखीमपुर : पिछले कुछ दिनों से फूलबेहड़ और इसके आसपास इलाके में बाघिन की मौजूदगी के निशान मिल रहे हैं। वहीं वनकर्मियों को भी पगचिह्न नजर आए हैं हालांकि राहत की बात यह है कि अभी तक किसी पर हमले या शिकार की बात सामने नहीं आई है।

गुरुवार को पिपरा मरोड़ा गांव के कुछ किसानों के खेतों में बाघिन देखे जाने की बात पर वन विभाग की टीम ने मौका मुआयना किया था। टीम को बाघिन के पगचिह्न खेतों में मिले थे जिससे वन विभाग टीम ने गन्ने के खेतों में हांका भी लगाया था। इस बीच किसी को बाघिन नजर नहीं आई जबकि शुक्रवार रात सांभर चौरा के पास फूलबेहड़ निवासी मोरध्वज को पुलिया के पास बाइक की रोशनी में बाघिन दिखाई दी थी। उधर शनिवार देर शाम कस्बे के समीप लिलौटीनाथ मंदिर के पश्चिम पिपरा मरोड़ा जाने वाले मार्ग पर गांव के कुछ किसानों को बाघिन दिखाई दी। वन विभाग की टीम रात में ही मौके पर पहुंची। कांबिग के दौरान बाघिन नजर नहीं आई। शारदानगर रेंजर एनके राय का कहना है कि बाघिन के पगचिह्न मिले हैं। टीम बराबर महेवागंज व फूलबेहड़ क्षेत्र में कांबिग कर रही है।

मूड़ासवारान में भीरा रेंज के गांव आलियाबाद में ग्रामीणों ने बताया कि यहां लगभग 15 दिनों से खेतों में विचरण कर रहे बाघ का आतंक समाप्त होने का नाम नहीं ले रहा है जिससे ग्रामीणों का दिन रात का चैन छिन चुका है। ग्रामीण रात जागकर गुजारने को विवश हैं। आलियाबाद व आसपास के गांव के ग्रामीणों को बाघ की दहाड़ प्रतिदिन सुनाई देती है जिससे वह डरे सहमे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में बाघ के पगचिन्ह कई जगह हैं व गोवंशीय पशुओं के अधखाए शव खेतों में पड़े हैं जिससे ग्रामीण खेतों की ओर रुख नहीं कर पा रहे हैं।

इसकी सूचना लोगों ने वन विभाग को देकर बाघ को पकड़ने की मांग की है। वन दारोगा उमर खान का कहना है कि वहां पर बाघ होने की जानकारी के बाद मौके पर पहुंचकर बाघ के पगचिह्न को देखा गया था। रेंजर भीरा राकेश बाबू ने बताया कि वनकर्मी निरंतर गश्त कर रहे हैं। ग्रामीणों को आगाह कर दिया गया है कि खेतों की ओर अकेले न जाएं।

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