निजी स्कूलों व अस्पतालों की लूट थमें तब बनेंगी बात

रायबरेली : इंदिरा गांधी उद्यान जिसको कभी दुनिया का तीसरा उद्यान का तमगा मिला था। उसे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रायबरेली के लोगों को सौंपा था। 1988 में यहीं उन्होंने पाकड़ का पेड़ भी लगाया था। जो इस समय बेहद खूबसूरत सा है। घनी पत्तियां तेज धूप की परछाई भी नीचे नहीं आने देतीं। शनिवार सुबह 'जागरण' ने इसी पार्क में सैर करने आने वालों के मध्य चौपाल लगाई। जानना चाहा राजनीतिक मिजाज। पूछा गया कि जिले की सबसे बड़ी आवश्यकता क्या है? तीन चीजें प्रमुखता से सामने आईं। जिसमें, निजी स्कूलों में मनमानी फीस व किताब-कॉपियों के नाम पर शोषण, सरकारी स्कूलों में बेपटरी शिक्षा व्यवस्था व रेलवे की बदहाली के साथ ही बेहतर चिकित्सा व्यवस्था का अभाव। मॉर्निंग वाक पर लोगों ने बेबाक अपनी बातें रखीं। लोगों ने गांधी-नेहरू परिवार के गढ़ से अपनत्व की बात स्वीकारी, साथ में इन नेताओं से सीधा संवाद न होने का मलाल भी जताया। मोदी सरकार की नीतियों से सहमत दिखे तो मूलभूत सुविधाओं पर ध्यान न देने के लिए कोसा भी। पेश है रसिक द्विवेदी की रिपोर्ट..।

रायबरेली की सबसे प्रमुख जरूरत क्या है, चर्चा इसी सवाल से शुरू हुई तो व्यवसायी शीलनिधि अग्रवाल बोल पड़े कि रेलवे केंद्र सरकार के अधीन है। मगर यहां टिकट काउंटर नहीं बढ़ाए गए। रोजाना बड़ी संख्या में लोग रेलवे से सफर करते हैं.. रोज लाइन में लगते हैं। इन काउंटर की संख्या बढ़ानी चाहिए। तभी पास बैठे शिक्षक पुष्पेंद्र सिंह ने शिक्षा का मुद्दा उठा दिया। बोले, यहां निजी स्कूलों ने लूट मचा रखी है। मैंने अपने बच्चे की दस पेज की बुक ली, जिसका मूल्य 250 रुपये था। प्राइवेट स्कूलों में टीसी निकलवाने जाओ तो पांच सौ रुपये ले लिए जाते हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में ये फ्री होता हा। निजी स्कूलों में एक-एक बच्चे की फीस चार से पांच हजार रुपये वसूले जा रहे हैं। इस लूटखोरी पर लगाम लगानी चाहिए, ताकि आम आदमी भी अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला सकें।

स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली पर अधिवक्ता पिटल सिंह खासे नाखुश दिखे। बोले, कहने को तो ये वीआइपी जिला है, मगर यहां किसी भी सरकारी अस्पताल में वेंटीलेटर की व्यवस्था नहीं है। एम्स में सिर्फ ओपीडी खुली है। गंभीर मरीजों को लखनऊ ले जाते वक्त 100 में 70 की मौत हो जाती है। नेता किसी भी पार्टी का हो, जनपद में ये सहूलियतें तो होनी ही चाहिए। यहीं बैठे डीबी सिंह बोले, सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरे, बशर्ते शिक्षक समय से आएं। उन्हें तनख्वाह तभी दी जाए, जब रिजल्ट अच्छा आए। और एक बात, सरकारी कर्मचारी चाहे शिक्षक हो या कुछ और, अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में ही पढ़ाए। इस पर शिक्षक पुष्पेंद्र बोल पड़़े, अरे अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजें तो शिक्षक समय पर पहुंच ही जाएंगे। दवा व्यवसायी सुशील कुमार ने एम्स का मुद्दा उठाया। कहा, पहले एम्स की ओपीडी में चार सौ से पांच सौ मरीज रोजाना आते थे मगर अब इनकी संख्या घटकर 100 से कम हो गई। कारण, यहां आर्थो, मेडिसिन और डेंटल के डॉक्टर ही नियमित ओपीडी करते हैं। ओपीडी खोली है तो कम से कम उसका सही से संचालन तो कराना चाहिए, ताकि आम जनता को इसका लाभ मिल सके। व्यवसायी ओम प्रकाश सावलानी ने सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर नाराजगी जतायी। साथ ही इंदिरा उद्यान में चार साल से शुल्क वसूलने के बावजूद आवश्यक सुविधाएं न देने का आरोप लगाया। अधिवक्ता प्रभु कुमार ने कहाकि पूर्व प्रधानमंत्री स्व.राजीव गांधी ने ये उद्यान बनवाया, मगर यहां हरियाली को बढ़ाने के लिए प्रयास नहीं हुए। निजी संस्थाएं ही पौधरोपण करती हैं। व्यवसायी प्रभात जायसवाल कहते हैं कि गार्डेन के बगल ही नगर पालिका कूड़ा डंप कर रही है, जिससे वातावरण प्रभावित हो रहा है। कम से कम गांधी-नेहरू परिवार के सदस्यों को इस उद्यान के लिए कुछ तो करना चाहिए था। चिकित्सा सुविधाओं से नाराज डीबी सिंह फिर तेज हुए, बोले-यहां डॉक्टरों का इतिहास पढ़ लीजिए। जिले में आता है तो गरीब होता है और अमीर होकर यहीं बस जाता हैं। वहीं शिक्षक पुष्पेंद्र ने कहा कि शहर हो या गांव, लोग फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। छात्र राजीव बोले, स्व. फिरोज गांधी के समय से यही चला आ रहा है कि यहां न सांसद जनता से मिलती हैं और न ही उनके प्रतिनिधि। हम अपनी समस्या बताएं तो बताएं किसको। रणवीर सिंह बोले कि जनपद में उच्च शिक्षा जैसे मेडिकल, इंजीनियरिग के कालेज खुलने चाहिए। तभी वीआइपी जिला माना जाएगा।

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