वैज्ञानिक मनोवृत्ति हमें तथ्य व तर्कसंगत विश्वास सिखाती है

प्रतापगढ़ यदि हम विज्ञान की आधारभूत अवधारणा पर चितन करें तो विज्ञान को किसी विषय के तथ्य

JagranWed, 27 Oct 2021 10:27 PM (IST)
वैज्ञानिक मनोवृत्ति हमें तथ्य व तर्कसंगत विश्वास सिखाती है

प्रतापगढ़ : यदि हम विज्ञान की आधारभूत अवधारणा पर चितन करें तो विज्ञान को किसी विषय के तथ्य व तर्क परक,क्रमबद्ध एवं सुव्यवस्थित ज्ञान के रूप में परिभाषित किया जाता है। वास्तव में विज्ञान हमें तर्क के सर्वाधिकार से अवगत कराता है।जहां एक ओर विज्ञान हमें हमारे जीवन में घटित होने वाली सभी प्राकृतिक घटनाओं के पीछे 'क्यों,कब,कहाँ,कैसे,क्या आदि जैसे सहज प्रश्नों एवं उनके तार्किक एवं विज्ञान सम्मत उत्तरों की खोज के लिए प्रेरित करता है, वहीं दूसरी ओर यह चेतन और अचेतन मस्तिष्क के बीच सामंजस्य स्थापित करने का शाश्वत माध्यम है।

मनोवृत्ति के वैज्ञानिक और अवैज्ञानिक होने के बीच का सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह है कि वैज्ञानिक मनोवृत्ति हमें तथ्य व तर्कसंगत विश्वास सिखाती है। अवैज्ञानिक मनोवृत्ति अंधविश्वास। आदिकाल से ही अवैज्ञानिक मनोवृत्ति ने मानव समाज के पैरों में अंधविश्वास की अनगिनत बेडियां डाल रखी हैं।यकीनन आज के विद्यार्थी के लिए शिक्षा के आरंभिक चरण में ही वैज्ञानिक मनोवृत्ति के सहज बीज रोपने का हर संभव प्रयास विद्यालय,शिक्षक एवं पाठ्यक्रमों द्वारा किया जा रहा है, कितु समाज में अंधविश्वास की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इतनी जल्दी समूल नाश बहुत दुष्कर प्रतीत होता है। सर्वविदित है कि वैज्ञानिक मनोवृत्ति के चलते ही इक्कीसवीं सदी को वैज्ञानिक युग कहा गया है।नई शिक्षा नीति में इस बात पर बल दिया जा रहा है कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक ²ष्टिकोण एवं चितन को बाल्यावस्था से ही ²ढ़ किया जा सके।वास्तव में कोई भी मनोवृत्ति एकाएक न तो जन्म ले सकती है और न ही नष्ट हो सकती है। वैज्ञानिक मनोवृत्ति के लिए भी यह कथन सौ फीसदी सही है। हमें अपनी कक्षाओं और विद्यालयों के वातावरण को वैज्ञानिक मनोवृत्ति के अनुरूप विकसित करने की नितांत आवश्यक है। क्योंकि देश के वास्तविक विकास हेतु वैज्ञानिक ²ष्टिकोण का विकास बेहद आवश्यक है। आज का युग विज्ञान का युग है। हम सभी कंप्यूटर और मोबाइल पर एक क्लिक करके महीनों में पहुंचने वाले संदेश पलक झपकते भेज रहे हैं, सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कुछ घंटों में तय कर रहे हैं और तो और हमने पृथ्वी की सीमाओं के बंधन को तोड़कर चांद की सरजमीं पर जीवन की उम्मीद बोई हैं। हम अपनी जद में सूरज तक को लाने के लिए प्रयासरत हैं। हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी नित नए प्रयोग कर असंभव को संभव बना रहे हैं। यह सब वैज्ञानिक मनोवृत्ति के दूरगामी परिणाम ही हैं। विश्व के साथ न केवल कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए अपितु पुन: विश्व गुरू का गर्व धारण करने के लिए राष्ट्र के प्रत्येक नागरिक को वैज्ञानिक मनोवृत्ति अपनाने की नितांत आवश्यकता है।-डॉ. अनिल कुमार निलय, प्रधानाचार्य राजकीय विद्यालय सराय आनादेव

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