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कोरोना काल में बुकिंग घटने से गाड़ी की किश्त भरना मुश्किल

प्रतापगढ़ : लॉकडाउन ने निजी वाहन संचालन पर खासा असर डाला है। केवल जरूरी कार्य से ही लोगों के यात्रा करने से ट्रैवेल एजेंसियों की बुकिग घट गई है, जिससे गाड़ी का निजी खर्च तक निकालना मुश्किल हो रहा है। वाहन मालिकों का हाल बेहाल है। इसका आम जन पर भी असर पड़ रहा है। उन्हें अधिक किराया देना पड़ रहा है।

यहां अब तक महानगरों की तरह ओला जैसी कैब सुविधा नहीं है। यहां किसी निजी एजेंसी ने वाहन उपलब्ध कराने की शुरुआत नहीं की है। ऐसे में ट्रैवेल एजेंट ही काम आते हैं। शहर से लेकर तहसील मुख्यालयों व कस्बाई बाजारों तक में ट्रैवेल एजेंसियों का जाल फैला है। यह हर तरह के वाहन बुकिंग पर देते हैं। साधारण से लेकर लग्जरी गाड़ियां इनके पास हैं। मगर लॉकडाउन की शुरुआत के बाद से ही इस कारोबार के खराब दिन चल रहे हैं। इसकी वजह यह है कि लोग किसी इमरजेंसी या इलाज के लिए अस्पताल जाने जैसी जरूरतों में ही ट्रैवेल एजेंसी से गाड़ी बुक करा रहे हैं। शादी-ब्याह में भी सीमित संख्या में लोगों के शामिल होने की बाध्यता की वजह से वाहनों की मांग कम हो गई हैं। धार्मिक यात्राएं भी लगभग बंद हैं। सैर-सपाटे पर मंदी छाई है। इन कारणों से ट्रैवेल एजेंसी संचालक मायूस हैं। फिलहाल आलम यह है कि तीन-चार दिन तक कोई बुकिग ही नहीं होती। घर से गाड़ी एजेंसी तक लाने व घर लौटने तक का डीजल-पेट्रोल का खर्च भी जेब से देना होता है। तीन महीने ड्राइवर को बिना काम का पैसा देना पड़ा। ऐसे में एक रुपये किमी किराया बढ़ाया गया है। --

सवा सौ हैं एजेंसियां

जिले में करीब सवा सौ ट्रैवेल एजेंसियां हैं। इनमें से 25 शहर क्षेत्र में है। लालगंज, कुंडा, पट्टी, रानीगंज सहित कस्बाई बाजारों में भी इनका संचालन हो रहा है। इन दिनों हर एजेंसी पर अधिकांश वाहन खड़े देखे जा सकते हैं। हरिद्वार और काशी जैसे शहरों की बुकिग ठप है।

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फोटो 10 पीआरटी 8 लॉकडाउन लगाना सरकार की मजबूरी है, लेकिन इसका असर हम लोगों के काम पर बहुत है। अभी तो लोग एजेंसी की गाड़ी बुक करने से बच भी रहे हैं। इससे आमदनी से अपना हिस्सा निकाल पाना मुश्किल हो रहा है।

-अवधेश उपाध्याय, एजेंसी संचालक

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फोटो 10 पीआरटी 9 जब लोग सफर करेंगे, बरात जाएंगे, बाहर अपने काम से जाएंगे, तभी तो वाहनों की उनको जरूरत होगी। इन दिनों हर आदमी खुद को कोरोना संक्रमण से बचाने में हर काम टाल रहा है। यही वजह है कि वाहन बुकिग आधी हो गई है।

-सूरज कुमार, एजेंसी संचालक

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डीजल का दाम बढ़ने व बुकिग कम होने से तरह-तरह की मुश्किल हो रही है। चालक का खर्च, गाड़ी का मेंटीनेंस और नई गाड़ियों की किस्त का खर्च कैसे निकालें, यह समझ में नहीं आ रहा है। बेहद मुश्किल स्थिति है।

-शरद श्रीवास्तव, एजेंसी संचालक

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