बच्चों की आंखों तक पहुंचा संक्रमण, खतरे में हार्मोनल बैलेंस

सावधान आपका बच्चा कहीं आंखों में जलन या धुंधला दिखाई देने की शिकायत तो नहीं कर रहा। अगर ऐसा है तो आपको तुरंत चिकित्सक से सलाह लेनी होगी। करीब दो साल से लगातार मोबाइल से काम करते-करते बहुत से बच्चों की आंखें संक्रमित हो चुकी हैं। समय रहते इस गंभीर संकेत के बावजूद चिकित्सक के पास बच्चे को लेकर नहीं गए तो यह खतरा बढ़ सकता है। आंख की यह बीमारी सिरदर्द के साथ हार्मोनल बैलेंस को खतरे में डाल सकती है।

JagranFri, 18 Jun 2021 10:52 PM (IST)
बच्चों की आंखों तक पहुंचा संक्रमण, खतरे में हार्मोनल बैलेंस

जासं, प्रतापगढ़ : सावधान, आपका बच्चा कहीं आंखों में जलन या धुंधला दिखाई देने की शिकायत तो नहीं कर रहा। अगर ऐसा है तो आपको तुरंत चिकित्सक से सलाह लेनी होगी। करीब दो साल से लगातार मोबाइल से काम करते-करते बहुत से बच्चों की आंखें संक्रमित हो चुकी हैं। समय रहते इस गंभीर संकेत के बावजूद चिकित्सक के पास बच्चे को लेकर नहीं गए तो यह खतरा बढ़ सकता है। आंख की यह बीमारी सिरदर्द के साथ हार्मोनल बैलेंस को खतरे में डाल सकती है।

महीनों बाद जब मेडिकल कालेज में ओपीडी सेवा शुरू हुई तो मरीजों का आना भी शुरू हो गया। इस बीच नेत्र विभाग में अभिभावक अपने ऐसे बच्चों को लेकर पहुंचने लगे, जिनकी उम्र 12 से 16 साल के बीच रही। इन बच्चों में अधिकांश को आंखों में जलन, कम दिखने, लाल-पीला घेरा दिखने, सिर में दर्द के साथ ही चिड़चिड़ाहट की समस्या थी। यहां आने वाले 30 मरीजों में इस तरह के केस आधे से अधिक होने लगे। उनका परीक्षण किया गया तो कई के रेटिना में सूखापन मिला। पुतलियां बीमार मिलीं। रोशनी का औसत कम मिला। सिर में दर्द की वजह भी इनसे ही कनेक्ट मिली। इनको उचित सलाह देकर व कुछ को चश्मा लगाकर घर भेजा गया। इन सबने परीक्षण कर रहे नेत्र सर्जन डा. विवेक त्रिपाठी को बताया कि कोरोना काल के पहले ऐसा नहीं था। जब से लगातार मोबाइल पर ही क्लास व परीक्षा चली तब से इस तरह की समस्या आनी शुरू हुई।--

खिच सकती हैं नसें

इस मसले पर वरिष्ठ फिजीशियन डा. आरपी चौबे से बात की गई तो उन्होंने इस पर चिता जताई। कहा कि आंखें कमजोर होंगी तो बच्चे जोर देकर स्क्रीन देखेंगे। इससे नशों में खिचाव व तनाव अधिक होगा। इससे जरूरी हार्मोस का स्त्राव असंतुतिल हो सकता है। यह उलझन, बेचैनी, उल्टी, झुंझलाहट, अनिद्रा की वजह बन सकती है। इसका समय पर उपचार न किया गया तो बच्चे मानसिक रोग के शिकार भी हो सकते हैं।

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यह बरतें सावधानी

लगातार मोबाइल पर काम न करें। आंखों को ताजे पानी से कई बार धोएं। पलकों को बार-बार झपकाते रहें। अंधेरे में स्क्रीन को न देखें। कम से कम दो फीट दूर रखें मोबाइल। दिनभर में 25 से 45 मिनट ही कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल की स्क्रीन देखें। एक बार में 25 मिनट से अधिक नहीं। स्क्रीन की चमक कम रखें।

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पौष्टिक हो भोजन

वरिष्ठ फिजीशियन डा. मनोज खत्री की सलाह है कि बच्चों को भोजन भी अच्छा देना चाहिए। यह अभिभावक की जिम्मेदारी है। खाने में विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन ई, ल्यूटिन, जिएंथिन और ओमेगा फैटी एसिड बढ़ा दें। खासकर आंवला, हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम, अखरोट, अंडे, मछली, गाजर, चुकंदर, आम, पपीता, खट्टे फल शामिल करें।

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