पीलीभीत में नगर पंचायत अध्यक्ष के पति समेत 17 आरोपितों पर गैंगस्टर

पीलीभीत में नगर पंचायत अध्यक्ष के पति समेत 17 आरोपितों पर गैंगस्टर
Publish Date:Thu, 29 Oct 2020 10:55 PM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, पीलीभीत: सिटी पोस्ट आफिस की भूमि पर अवैध रूप से कब्जा करने के मामले में जहानाबाद नगर पंचायत की अध्यक्ष ममता गुप्ता के पति दुर्गाचरण गुप्ता उर्फ अन्ना समेत 17 आरोपितों के खिलाफ कोतवाली पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने अन्ना को गिरोह का सरगना दर्शाया है।

सदर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक श्रीकांत द्विवेदी की ओर से बुधवार की रात गिरोहबंद समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम के तहत दर्ज कराए गए मुकदमे में दुर्गाचरण गुप्ता उर्फ अन्ना तथा पुत्र शिवा गुप्ता, उमेश सिंह, शेष कुमार, ब्रजेश सिंह, प्रद्युम्मन सिंह, सोमवीर सिंह, राजीव कुमार, योगेंद्र कुमार सिंह, आशीष कुमार सिंह, अनिरुद्द सिंह, नीलेश सिंह, पारसमणि पांडेय, शैलेंद्र शर्मा, लोकेश कुमार, जितेंद्र कुमार गंगवार तथा हारून को नामजद किया।

यह था मामला

शहर के जेपी रोड स्थित सिटी पोस्ट आफिस की भूमि का आरोपितों ने 24 दिसंबर 2018 को उपनिबंधक कार्यालय सदर में बैनामा करा कब्जा दर्शाया। नौ जुलाई 2019 की रात में जेसीबी चलवाकर उक्त भूमि पर कब्जा कर लिया था। इस मामले को लेकर स्थानीय मुख्य डाकघर के सहायक डाकघर अधीक्षक अजय कुमार जैन की ओर से आरोपितों के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। सदर कोतवाली पुलिस ने आरोपित लोकेश कुमार गंगवार, हारून, उमेश सिंह, शेष कुमार, ब्रजेश सिंह, आशीष कुमार सिंह, जितेंद्र सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोपित शिवा गुप्ता, सोमवीर सिंह, पारसमणि पांडेय, शैलेंद्र , प्रद्युम्मन सिंह, अनिरुद्ध सिंह, नीलेश ने हाईकोर्ट से गिरफ्तारी के विरुद्ध स्टे प्राप्त किया था। मुख्य आरोपित दुर्गाचरण गुप्ता उर्फ अन्ना ने जिला एवं सत्र न्यायालय में हाजिर होकर अंतरिम जमानत कराई थी।

दारोगा ने हटा दी थीं गंभीर धाराएं

आरोपित राजनीतिक क्षेत्र में खासा दखल रखते हैं इसलिए शुरू में इनकी अनदेखी का प्रयास हुआ। बाद में मामला गरमाया तो मुकदमा दर्ज हुआ, जिसे सुनगढ़ी थाना स्थानांतरित कर दिया गया। वहां दारोगा गौरव विश्नोई ने विवेचना कर मुकदमे से गंभीर धाराओं को ही हटा दिया था। भनक लगने पर सहायक डाकघर अधीक्षक ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी, जिसके बाद मुकदमे में दोबारा विवेचना का आदेश दिया गया।

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