चिड़ियाघर नहीं भेजे जाएंगे बिगड़ैल बाघ

पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के जंगल से निकलकर खेतों और आबादी क्षेत्र में उत्पात मचाने वाले बिगड़ैल बाघों को अब ट्रैंकुलाइज करने के बाद भी चिड़ियाघर भेजने की नौबत नहीं आएगी। कुछ दिन उन्हें सुधारे की ट्रेनिंग दी जाएगी और दोबारा जंगल में छोड़ दिया जाएगा। हां इस दौरान उनकी पैनी निगरानी रहेगी।

JagranWed, 16 Jun 2021 11:01 PM (IST)
चिड़ियाघर नहीं भेजे जाएंगे 'बिगड़ैल' बाघ

पीलीभीत,जेएनएन : पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के जंगल से निकलकर खेतों और आबादी क्षेत्र में उत्पात मचाने वाले 'बिगड़ैल' बाघों को अब ट्रैंकुलाइज करने के बाद भी चिड़ियाघर भेजने की नौबत नहीं आएगी। कुछ दिन उन्हें सुधारे की ट्रेनिंग दी जाएगी और दोबारा जंगल में छोड़ दिया जाएगा। हां, इस दौरान उनकी पैनी निगरानी रहेगी। इसके लिए पीटीआर प्रशासन ऐसे बाघों के गले में रेडियो कॉलर लगाएगा। जीपीएस सिस्टम से लैस रेडियो कॉलर लगा होने से टाइगर रिजर्व के अधिकारी मुख्यालय में बैठकर बिगड़ैल बाघ की लोकेशन और गतिविधियों को जान समझ सकेंगे।

वर्ष 2019-20 में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइन से कराई गई गणना के बाद पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल में 65 से अधिक बाघ होने की पुष्टि हुई थी। तब से अब तक जंगल में बाघों की संख्या और बढ़ने का अनुमान है। चार साल के भीतर बाघों की संख्या दोगुनी हो जाने पर टाइगर रिजर्व को ग्लोबल अवार्ड भी मिल चुका है। बढ़ती संख्या के कारण अक्सर कोई न कोई बाघ बागी होकर जंगल से बाहर निकल आता है। कई बार खेतों से लेकर आबादी तक इनकी चहलकदमी होने लगती है। इंसानों पर हमला करते हैं। अभी तक यह व्यवस्था रही है कि जंगल से बाहर घूमने वाले बाघ को रेस्क्यू करके पिजरे में कैद कर लिया जाता है। इसके बाद विभागीय उच्चाधिकारियों के निर्देश पर किसी प्राणि उद्यान में भिजवाया जाता है। कुछ ही बाघों को सुरक्षित जंगल भेजा जाता था।

नहीं था निगरानी का कोई माध्यम

रेस्क्यू करके पकड़े गए बाघ को वापस जंगल में छोड़ने के बाद उसकी गतिविधियों की निगरानी करने का अभी तक टाइगर रिजर्व के पास कोई कोई तंत्र नहीं था। अब दो रेडियो कॉलर मिल गए हैं। इसके चलते अब बाघों को ट्रैंकुलाइज करने के बाद चिड़ियाघर नहीं बल्कि जंगल में छोड़ जाएगा। साथ ही गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सकेगी। ऐसे काम करेगा रेडियो कॉलर

जंगल से बाहर आए बाघ को विशेषज्ञों की टीम ट्रैंकुलाइज किया जाएगा। इससे कुछ समय के लिए बाघ बेहोश हो जाता है। उसी दौरान ग्लोबल पोजीशनिग सिस्टम (जीपीएस) से लैस रेडियो कॉलर बाघ के गले में फिट कर दिया जाएगा। इसके बाद बाघ पिजरे में कैद हो जाएगा। बाघ के स्वास्थ्य की जांच और ट्रेनिंग के बाद उच्चाधिकारियों के निर्देश पर उसे वापस किसी जंगल में छोड़ दिया जाएगा। इनसेट

इस साल पकड़े जा चुके चार बाघ

- माला रेंज में पकड़े गए दो बाघ कानपुर प्राणि उद्यान में भेजे

- ललौरीखेड़ा क्षेत्र में गन्ने के खेत में जाल में फंसी बाघिन को रेस्क्यू करके दुधवा के जंगल में छोड़ा

- माधोटांडा क्षेत्र में घूमने वाले बाघ को रेस्क्यू कर पिजरे में कैद करके किशनपुर के जंगल में किया आजाद

दो रेडियो कॉलर का इंतजाम किया गया है, इन्हें रिजर्व में रखा गया है। विशेष परिस्थितियों में ही रेडियो कॉलर का उपयोग किया जाएगा। इसके माध्यम ये जंगल में वापस छोड़े गए बाघ की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सकेगी। सामान्य तौर पर जंगल से बाहर आने वाले बाघ खुद ही लौट जाते हैं। इस दौरान ग्रामीणों को सतर्क करने व बाघ की मानीटरिग के लिए विभागीय टीम को लगाया जाता है।

-नवीन खंडेलवाल, डिप्टी डायरेक्टर टाइगर रिजर्व

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