असामाजिकतत्वों से बचाकर बनाया प्रेरक विद्यालय

असामाजिकतत्वों से बचाकर बनाया प्रेरक विद्यालय
Publish Date:Sun, 27 Sep 2020 11:20 PM (IST) Author: Jagran

पीलीभीत,जेएनएन: गांव में स्थित परिषदीय विद्यालयों की सुरक्षा हमेशा बड़ा प्रश्न रहा है। बरखेड़ा विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय पिपरिया मंडन में भी स्टाफ के सामने यह समस्या खड़ी हुई थी। गांव के असामाजिक तत्व विद्यालय में बैठकर मद्यपान, शौच, तोड़फोड़ आदि करते थे। विद्यालय स्टाफ के समझाने पर भी लोगों की प्रवृत्ति में कोई खास परिवर्तन देखने को नहीं मिला। विद्यालय में पड़ी शराब की खाली बोतलों में बच्चे पानी भरकर पीने लगे जिससे उनमें गलत आदत विकसित होने लगी। इस बदतर स्थिति के बीच वर्ष 2018 में सोनिल कुमार ने विद्यालय में बतौर इंचार्ज प्रधानाध्यापक कार्यभार ग्रहण किया। उन्होंने सहयोगी शिक्षकों के साथ मिलकर पूरे गांव में व्यापक अभियान चलाया। परिणामस्वरूप लोगों को विद्यालय भवन की महत्ता समझ आई व गांव के ही कुछ लोग मिलकर प्रतिदिन विद्यालय की सुरक्षा के लिए गश्त भी करने लगे। सोनिल ने सहयोगी स्टाफ के साथ विद्यालय के भौतिक और शैक्षिक परिवेश में परिवर्तन की बीड़ा उठाया। अंग्रेजी माध्यम संचालित प्राथमिक विद्यालय पिपरिया मंडन आज प्रेरक विद्यालय बन गया है। नामांकन के साथ दैनिक उपस्थिति भी बढ़ी: वर्ष 2018 में 280 बच्चों का नामांकन था कितु दैनिक उपस्थिति बहुत कम थी। शिक्षकों के प्रयासों से वर्तमान में 390 बच्चों का नामांकन है जिसमें से अधिकांश बच्चे प्रतिदिन उपस्थित होते हैं। विद्यालय में चार सहायक अध्यापक व दो शिक्षामित्र तैनात हैं।

मातृ सम्मेलन कर बदला परिवेश: विद्यालय के परिवेश में परिवर्तन लाने के लिए लोगों का सहयोग बहुत आवश्यक था। विद्यालय स्टाफ ने मातृ सम्मेलन की संकल्पना को साकार बनाया। नियमित अंतराल पर बच्चों की माताओं को विद्यालय बुलाकर जागरूक किया। सभी माताओं को स्वच्छता किट वितरित की व उन्हें अपने बच्चों को प्रतिदिन स्वच्छतापूर्वक विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया।

नियमित बाल सभा की शुरुआत: विद्यालय में प्रतिदिन सुबह बाल सभा का आयोजन शुरू किया गया। माइक के माध्यम से प्रतिदिन अलग प्रार्थना, पीटी व योगाभ्यास के द्वारा विद्यालय में सकारात्मक माहौल विकसित किया गया।

यूनिफॉर्म में साथ टाई व बेल्ट भी हुई शामिल: विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के लिए यूनिफॉर्म में टाई व बेल्ट भी शामिल की गई। टाई व बेल्ट की व्यवस्था विद्यालय स्टाफ निजी व्यय से करता है। सामाजिक सहयोग से बच्चों को दैनंदिनी भी उपलब्ध कराई गई जिस पर प्रेरक प्रसंग, प्रार्थना आदि लिखी गईं है। दैनंदिनी पर प्रतिदिन गृहकार्य भी लिखा जाता है। समर कैंप का आयोजन: विद्यालय में ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान समर कैंप का आयोजन किया जाता है। कैंप में विभिन्न गतिविधियों के द्वारा बच्चों के व्यक्तित्व विकास पर ध्यान दिया जाता है। कैंप में रंगोली, क्राफ्ट जैसी कई रचनात्मक प्रतियोगिताओं का आयोजन होता है। खेल व पुस्तकालय की व्यवस्था: विद्यालय में बच्चों के शारीरिक विकास के लिए खेल के सामान की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। बच्चों को इंडोर व आउटडोर दोनों प्रकार के खेलों में प्रतिभाग कराया जाता है। ब्लॉक स्तर पर विद्यालय के बच्चों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा, बच्चों के मानसिक स्तर में वृद्धि के लिए पुस्तकालय की भी व्यवस्था की गई है।

वर्जन-- फोटो: 27 पीआइएलपी 27

विद्यालय के सहयोगी स्टाफ के साथ मिलकर बहुत परिवर्तन किया है। स्टाफ के सभी सदस्य हर कदम पर पूर्ण सहयोग करते हैं। हमारा लक्ष्य बच्चों का व्यक्तित्व विकास है। बच्चे भविष्य में एक बेहतर इंसान बनें, इस आशय के साथ विद्यालय में शिक्षा देते हैं।

- सोनिल कुमार, सहायक अध्यापक

मॉडल स्कूल पिपरिया मंडन की स्थिति में गत दो वर्षों में बहुत सुधार हुआ है। विद्यालय की कक्षाओं को पेंटिग व टीएलएम के माध्यम से आकर्षक बनाया गया है। बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों व गतिविधियों का आयोजन होता रहता है। पिपरिया मंडन में स्टाफ द्वारा बच्चों को बेहतर शैक्षिक परिवेश दिया जा रहा है।

- राकेश पटेल, जिला समन्वयक, सर्व शिक्षा अभियान

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