डेंगू संक्रमितों में वृद्धि, एक हजार लोगों की जांच

पीलीभीतजेएनएन डेंगू आशंकित मरीजों के सैंपल गुम होने के मामले में मुख्य विकास अधिकारी की सख्ती के बाद विभागीय जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। जिले में डेंगू संक्रमितों में वृद्धि होती जा रही है। डेंगू आशंकित मरीजों की संख्या एक हजार से अधिक हो गई है। उधर गायब सैंपलों पर शुरू से भ्रमित कर रहे विभागीय अधिकारी व जिम्मेदार कर्मी अब एक बार फिर नए बहाने ढूंढने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच में फंस रहे विभागीय कर्मियों को बचाने के लिए नियमों को ताख पर रखने से भी नहीं चूक रहे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी यह सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि सभी सैंपलों की एलाइजा जांच होना जरूरी नहीं है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा जांच होना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे डेंगू संक्रमण के दौरान आशंकित मरीजों पर कोई प्रो-एक्टिव कार्रवाई नहीं की क्योंकि वे एलाइजा की पुष्टि के बिना डेंगू संक्रमित नहीं मान रहे थे।

JagranTue, 30 Nov 2021 11:20 PM (IST)
डेंगू संक्रमितों में वृद्धि, एक हजार लोगों की जांच

पीलीभीत,जेएनएन: डेंगू आशंकित मरीजों के सैंपल गुम होने के मामले में मुख्य विकास अधिकारी की सख्ती के बाद विभागीय जिम्मेदारों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। जिले में डेंगू संक्रमितों में वृद्धि होती जा रही है। डेंगू आशंकित मरीजों की संख्या एक हजार से अधिक हो गई है। उधर गायब सैंपलों पर शुरू से भ्रमित कर रहे विभागीय अधिकारी व जिम्मेदार कर्मी अब एक बार फिर नए बहाने ढूंढने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी जांच में फंस रहे विभागीय कर्मियों को बचाने के लिए नियमों को ताख पर रखने से भी नहीं चूक रहे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी यह सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि सभी सैंपलों की एलाइजा जांच होना जरूरी नहीं है। भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार डेंगू की पुष्टि के लिए एलाइजा जांच होना जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे डेंगू संक्रमण के दौरान आशंकित मरीजों पर कोई प्रो-एक्टिव कार्रवाई नहीं की क्योंकि वे एलाइजा की पुष्टि के बिना डेंगू संक्रमित नहीं मान रहे थे। अगर स्वास्थ्य विभाग एलाइजा जांच जरूरी नहीं मानकर भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है तो ऐसे में जनपद में 1000 से अधिक डेंगू आशंकित मरीजों की जांच हो चुकी है। ये सभी मरीज कार्ड टेस्ट से डेंगू सक्रिय पाए गए थे। डेंगू संक्रमित मानकर सरकारी आंकड़े में शामिल किया जाना चाहिए। मंडलीय अधिकारी के साथ मंत्रणा: मंगलवार को मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डा. अखिलेश्वर सिंह सीएमओ कार्यालय पहुंचे। यहां डेंगू के गुम सैंपलों को लेकर उनकी सीएमओ व आइडीएसपी कर्मियों से लंबी बातचीत हुई। इस दौरान विभाग के जिम्मेदार कर्मियों को बचाने पर चर्चा होती रही। सैंपल के रिकार्ड व जांच में लापरवाही बरतने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने के स्थान पर उन्हें बचाने के लिए प्रयासरत विभागीय अधिकारियों की मंशा भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। सीडीओ ने दिया निजी लैबों को नोटिस: डेंगू आशंकित मरीजों के गुम हुए सैंपलों पर मुख्य विकास अधिकारी प्रशांत कुमार श्रीवास्तव ने निजी लैबों से जबाब तलब करने के आदेश दिए हैं। यह निर्णय सीएमओ कार्यालय द्वारा गुम हुए सैंपलों का ठीकरा निजी पैथोलाजी लैबों पर फोड़ने के बाद लिया गया है। सीएमओ कार्यालय की तरफ से मुख्य विकास अधिकारी को निजी लैबों द्वारा सूचना देने के बाबजूद सैंपल उपलब्ध न कराने की रिपोर्ट भेजी गई है। इस पर मुख्य विकास अधिकारी ने सीएमओ कार्यालय की तरफ से प्रस्तुत रिपोर्ट के आधार पर जबाब मांगा है। निजी लैब संचालकों से पूछा गया है कि उनके द्वारा सीएमओ कार्यालय को डेंगू आशंकित मरीजों के सैंपल उपलब्ध कराए गए अथवा नहीं। यदि उपलब्ध नहीं कराए गए तो क्यों न उनके पंजीकरण को निरस्त करने की कार्रवाई की जाए। इनसेट--

क्या है मामला-

जनपद में 3 से 7 नवंबर तक विभिन्न सरकारी व निजी पैथोलाजी लैबों द्वारा 146 डेंगू संदिग्ध मरीज मिलने की सूचना सीएमओ कार्यालय में संचालित आइडीएसपी सेल को दी गई। इन सैंपलों में से केवल 66 सैंपलों को ही कई दिन बाद 11 व 13 नवंबर को एलाइजा जांच के लिए केजीएमसी लखनऊ भेजा गया जिससे डेंगू की पुष्टि हो सके। शेष 80 सैंपल डेंगू संक्रमितों के सरकारी आंकड़े को कम रखने के लिए गायब कर दिए गए। बाद में सीएमओ कार्यालय ने सीडीओ को सूचना दी जिसमें 95 सैंपल कम बताए गए। इसके अलावा सैंपल लखनऊ भेजने में आठ से दस दिन तक की देरी की गई। रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने को कोई नहीं तैयार

कार्ड टेस्ट से संक्रमित पाए गए मरीजों की पुष्टि के लिए एलाइजा जांच में भेजे जा रहे सैंपल गायब किए गए तो सीडीओ ने रिपोर्ट तलब की। रिपोर्ट से सीडीओ संतुष्ट नहीं हुए तो खुद ही मामले की जांच करने सीएमओ कार्यालय पहुंच गए। इसके बाद दुबारा रिपोर्ट भेजने के आदेश दिए। आइडीएसपी सेल की तरफ से रिपोर्ट तैयार की गई लेकिन किसी स्वास्थ्य अधिकारी ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए। बिना हस्ताक्षर की रिपोर्ट सीडीओ ने वापस कर दी। अब कोई अधिकारी रिपोर्ट पर हस्ताक्षर कर खुद को फंसाना नहीं चाह रहा। वर्जन--

फोटो: 30 पीआइएलपी 46

डेंगू का प्रकोप भले ही कम हो गया है लेकिन प्रकोप के दौरान जो लापरवाही हुई है, वह क्षम्य नहीं है। सीएमओ कार्यालय की तरफ से निजी लैबों को दोषी बताया गया है तो उनसे भी जबाब मांगा जा रहा है। दोष पाए जाने पर पंजीकरण निरस्त कराया जाएगा। सैंपल न आने पर मंगाने की जिम्मेदारी आइडीएसपी सेल की है। सीएमओ कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी कार्रवाई कराई जाएगी।

- प्रशांत कुमार श्रीवास्तव, मुख्य विकास अधिकारी

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