सामुदायिक शौचालय बना आमदनी का जरिया

पीलीभीतजेएनएन दशकों से बदहाली की मार झेल रहे स्वयं सहायता समूह की सूरत बदलने लगी है। डीएम की पहल पर महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए रोजगार दिया जा रहा है। सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान हो या फिर गांवों में बनाए गए सामुदायिक शौचालय की कमान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दी जा रही है। गाय के गोबर से बने उत्पादों से आय बढ़ाने में भी प्रशासन की ओर से महिलाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

JagranTue, 30 Nov 2021 11:40 PM (IST)
सामुदायिक शौचालय बना आमदनी का जरिया

पीलीभीत,जेएनएन: दशकों से बदहाली की मार झेल रहे स्वयं सहायता समूह की सूरत बदलने लगी है। डीएम की पहल पर महिला सशक्तिकरण को ध्यान में रखते हुए रोजगार दिया जा रहा है। सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान हो या फिर गांवों में बनाए गए सामुदायिक शौचालय की कमान स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को दी जा रही है। गाय के गोबर से बने उत्पादों से आय बढ़ाने में भी प्रशासन की ओर से महिलाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए डीएम पुलकित खरे ने पहल शुरू की है। जनपद के महिला स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को 719 सुलभ शौचालय हस्तांतरण किए गए। सामुदायिक शौचालयों की जिम्मेदारी महिलाएं संभाल रही है। ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिला है। अब यह महिलाएं पति के साथ मिलकर परिवार का खर्च उठा रही हैं। सामुदायिक शौचालय में महिला को केयर टेकर बनाया गया है। प्रदेश सरकार की ओर से महिला स्वयं सहायता समूह को सामुदायिक शौचालयों की देखरेख के लिए नौ हजार रुपये दिए जा रहे हैं, जिसमें से छह हजार रुपये केयर टेकर का मानदेय होता है। तीन हजार रुपये शौचालय की साफ सफाई पर खर्च किए जाते है। बनाए जा रहे गोबर के उत्पाद

पहले भी डीएम महिला स्वयं सहायता समूह को सशक्त करने की पहल कर चुके हैं। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं को गाय के गोबर से उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिलाया। प्रशिक्षण मिलने के बाद महिलाओं ने गांव की और महिलाओं को प्रशिक्षित किया और फिर उन्हीं महिलाओं के साथ मिलकर गाय के गोबर से विभिन्न उत्पाद बना रही हैं। डीएम की पहल पर जिला ग्राम्य विकास अभिकरण ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को विकास भवन में दुकान आवंटित कर दी, जहां स्वयं सहायता समूह की महिलाओं की ओर से गाय के गोबर से तैयार उत्पादों की बिक्री की जा रही है। सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों का दायित्व

महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए डीएम ने सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों के आवंटन में वरीयता दी। जनपद के 33 महिला स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को सस्ते गल्ले की दुकानें दी गई है। अमरिया में पांच, कलीनगर में दो, बरखेड़ा में चार, बिलसंडा में छह, बीसलपुर में तीन, पूरनपुर में पांच, मरौरी में पांच और ललौरीखेड़ा में तीन दुकानों का संचालन महिला समूह कर रही हैं।

काम पुराना नई पहचान

माला कालोनी में दशकों से महिलाएं बीड़ी बनाने का काम करती रही हैं। डीएम पुलकित को जब जानकारी हुई तो उन्होंने इन महिलाओं से संवाद किया और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की पहल की। इन महिलाओं को समूह से जोड़ा और उसके बाद प्रशिक्षण दिलाने के साथ ही बैंक से ऋण दिलाया, जिससे यह महिलाएं अपना स्वरोजगार बेहतर ढंग से शुरू कर सकें। अब यह महिलाएं गांव की अन्य महिलाओं को जोड़ कर उनको आर्थिक रूप से मजबूत कर रही हैं। गांव की महिलाओं के साथ मिलकर गुरु नानक स्वयं सहायता समूह बनाया। सालों तक कोई काम नहीं मिला। सभी मेहनत मजदूरी कर रही थीं। डीएम की ओर से सामुदायिक शौचालय देने से हमारे समूह की आर्थिक स्थिति सुधरी है। हमको काम मिला है।

साबिर बेगम, कजरी निजामपुर गांव में महिलाओं को काम नहीं मिलता है। डीएम की पहल पर हमारे समूह को सामुदायिक शौचालय का काम दिया गया, जिससे समूह को रोजगार मिला। सरकार की इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को उनके ही गांव में रोजगार मिल गया है।

सीमा, पूरनपुर देहात स्वयं सहायता समूह की महिलाएं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 719 सामुदायिक शौचालय महिला समूह को हस्तांतरित किए गए हैं, जिससे उनकी आजीविका में मदद मिलेगी।

उपेंद्र राज सिंह, जिला पंचायत राज अधिकारी फैक्ट फाइल

720 : ग्राम पंचायत है जनपद में

01 : ग्राम पंचायत में नहीं है सामुदायिक शौचालय

33 : महिला समूह चला रहे उचित दर की दुकानें

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