विदेश में पटकनी देने वाले मल्ल की देश में अनदेखी, भीम पहलवान युवा सेवा समिति प्रशासन से लगा रही गुहार

भीम पहलवान ने अपने समय के महान लीलाराम हिंद केसरी श्रीपत खनकले एशियाई चैंपियन गणपत आण्डलकर और मारुति माणे आदि के साथ मल्लयुद्ध किया। कई संगठन व समिति मल्ल के मानसम्मान में जन जागरण अभियान चलाने की तैयारी में हैं।

Neel RajputTue, 15 Jun 2021 01:33 PM (IST)
कई संगठन व समिति मल्ल के मानसम्मान में चलाएंगी जन जागरण अभियान

ग्रेटर नोएडा/बिलासपुर [घनश्याम पाल]। गुरु जसराम अखाड़ा के अर्जुन अवार्डी भीम सिंह भाटी उस युग से ताल्लुक रखते थे। जब देश में कुश्ती में सेवाओं का पूरा वर्चस्व था। भीम का जन्म उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के रामपुर माजरा गांव के किसान परिवार में हुआ था। वर्तमान जिला गौतमबुद्ध नगर दिल्ली के पास है।

भीम पहलवान ने अपने समय के महान लीलाराम, हिंद केसरी श्रीपत खनकले, एशियाई चैंपियन गणपत आण्डलकर और मारुति माणे आदि के साथ मल्लयुद्ध किया। इसके अलावा महान हिंद केसरी मेहरुद्दीन, आगरा के निरंजन, पंजाब के रामचरण सिंह, गुरु चरण सिंह, लाला, चिराग और पाकिस्तान के इकराम इलाही व इंग्लैंड के मैकेन मारा को चारोखाने चित कर परचम लहराया।

उपलब्धियां

1962/63, 63/64, 65/66, 66/67 व 67/68 के वर्षों में पांच बार नेशनल हैवी वेट चैंपियन रहे। 1963 में भारत में हुई भारत-अफगान कुश्ती की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 1965 में रूस टेस्ट मैच व इंडो में हैवी वेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1964/65 में सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के तहत ईरान का दौरा किया और कुश्ती बैठक में ईरान के खिलाफ हैवी वेट क्लास में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारत-ईरान टेस्ट मैचों में भारी वजन में भारत का प्रतिनिधित्व किया और एक विश्वसनीय रिकार्ड दर्ज किया। 2 मैच जीते, 2 डा हुए, 5वां विवादित रहा। उसे चैंपियन आफ द सीरिज घोषित किया। वर्ष 1966 में जमैका में आयोजित राष्टमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 1966 में बैंकॉक में आयोजित 5वें एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और स्वर्ण पदक जीता। वर्ष 1966 अर्जुन पुरस्कार विजेता बने। वर्ष 1967 दिल्ली में वर्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया। स्वर्गीय एयर वाइस मार्शल कंवर जसवंत सिंह की स्मृति में स्थापित कंवर जसवंत सिंह टाफी से सम्मानित किए गए। वर्ष 1970 बैंकॉक में आयोजित 6वें एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

पर्यावरण संरक्षण समिति के अध्यक्ष संजय नवादा ने कहा, 'गौतमबुद्धनगर जिले का दनकौर वह स्थान है, जहां एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य की प्रतिमा को अपना गुरु मानकर धनुर्विद्या सीखी थी। यह क्षेत्र पहलवानों का गढ़ रहा है। बीस वर्ष पूर्व बना भीम पहलवान स्टेडियम जर्जर है। प्रदेश सरकार व कुश्ती संघ ध्यानाकर्षण के लिए समिति भीम पहलवान जन जागरण अभियान चलाएगी।'

मिशन क्राइम फ्री इंडिया संगठन के अध्यक्ष अमित पहलवान ने कहा, 'एक समय था क्षेत्र गांव-गांव घर-घर पहलवानों का हुजूम था। अब युवाओं का पहलवानी से मोह भंग होता जा रहा है। सरकार से पहलवानों का आरोप है कि स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद तो करती है, मगर सुविधा प्रदान नहीं करती। सरकार की उपेक्षा के कारण मध्य वर्ग से जुड़े लोग आर्थिक तंगी के चलते कुश्ती व पहलवानी छोड़ रहे हैं। भीम स्टेडियम सुंदरीकरण व सुविधा युक्त बनाने के लिए भीम पहलवान जन जागरण अभियान चलाया जाएगा।'

भीम पहलवान युवा सेवा समिति के अध्यक्ष योगेश भाटी ने कहा, 'शासन प्रशासन व प्राधिकरण से लगातार भीम पहलवान स्टेडियम सुंदरीकरण के लिए मांग की जा रही है। विदेशों में पटकनी देने वाले अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित भीम पहलवान से सरकार के अनदेखी के कारण क्षेत्र के युवा अनभिज्ञ होते जा रहे हैं। समिति भीम पहलवान जन जागरण अभियान चलाएगी।'

शांति समिति रामपुर माजरा के अध्यक्ष बलराज भाटी ने कहा, 'हमारे परिवार के बुजुर्ग भीम पहलवान दो बार स्वर्ण पदक विजेता दर्जनों देशों में दर्जनों दफा भारत का नाम रोशन विश्वपटल पर किया। आज शासन प्रशासन अनदेखी के कारण पहलवानों के प्रेरणा श्रोत भीम स्टेडियम का अस्तित्व खतरे में है। भीम पहलवान जन जागरण अभियान में गांव साथ है।'

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