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नोएडा क्रिकेट स्टेडियम कथित घोटाले में तत्कालीन वरिष्ठ परियोजना अभियंता पर आरोप तय

नोएडा [कुंदन तिवारी]। सेक्टर-21 ए नोएडा स्टेडियम में बने क्रिकेट स्टेडियम के साथ पवेलियन निर्माण में सीबीआइ ने प्राधिकरण के तत्कालीन वरिष्ठ परियोजना अभियंता संदीप चंद्रा पर आरोप तय कर दिए हैं। सीबीआइ की सात सदस्यीय जांच कमेटी ने रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। इसके साथ ही नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को अवगत कराया है कि वरिष्ठ परियोजना अभियंता को उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 का उल्लघंन करने का दोषी पाया और कथित घोटाला कर प्राधिकरण को करोड़ों रुपये राजस्व की हानि पहुंचाई।

इसके बाद शासन की ओर से नोएडा प्राधिकरण को लिखित पत्र के जरिए अवगत कराया गया है कि यदि वह चाहे तो अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच कर कार्रवाई कर सकते हैं। हालांकि सूत्र बताते हैं कि शासन के जारी पत्र पर नोाएडा प्राधिकरण ने विभागीय जांच करने से इनकार कर दिया है, शासन को पत्र लिखकर कहा है कि परियोजना अभियंता का नोएडा प्राधिकरण से तबादला हाे चुका है।

वह यूपीसीडा में मुख्य अभियंता के पद पर कानपुर में तैनात हैं। ऐसे में जांच अब यूपीसीडा करे या शासन कराए। इसके बाद उत्तर प्रदेश मुख्य सचिव की ओर से मामले पर 19 जून को यमुना एक्सप्रेस-वे प्राधिकरण मुख्य कार्यपालक अधिकारी अरूणवीर सिंह को जांच अधिकारी नियुक्त कर दिया है। हालांकि, मुख्य अभियंता संदीप चंद्रा की ओर से दावा किया गया है कि उन्हाेंने अपना पक्ष जांच अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।

यहां पर फंस गए मुख्य अभियंता

सीबीआई ने सेक्टर-21 ए में इंटीग्रेटेड स्पोर्ट कांप्लेक्स में क्रिकेट स्टेडियम के साथ पवेलियन निर्माण में विभिन्न एजेंसियों की जांच रिपोर्ट के क्रम में कथित अनिमितताओं का गहन परीक्षण इंजीनियरिंग व वित्तीय दृष्टि से कराने के लिए एक सात अधिकारियों की एक समिति का गठन किया गया। समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट 7 नवंबर 2019 को प्रस्तुत की। समिति द्वारा पाया गया कि (स्तूप कंस्लटेंट प्राइवेट लिमिटेड) द्वारा प्रस्तुत कोटेशन को तत्कालीन वरिष्ठ परियोजना अभियंता संदीप चंद्रा द्वारा सत्यापित नहीं किया गया। इसके साथ ही एकल कोटेशन पर कोई आपत्ति नहीं की और हस्ताक्षर कर दिया। इससे प्राधिकरण को करोड़ों रुपए राजस्व हानि भी हुई। इसकी एक रिपोर्ट सीबीआई ने उत्तर प्रदेश शासन के साथ-साथ प्राधिकरण को सौंपी।

यह है कथित घोटाला

वर्ष 2010-11 में सेक्टर-21 ए स्थित नोएडा स्टेडियम में नोएडा स्टेडियम पवेलियन सहित बनाने के लिए नोएडा प्राधिकरण की ओर से 60 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया था। इसके निर्माण को पूरा करने में 300 करोड़ रुपये खर्च किया गया, लेकिन वर्ष 2015 में जब तीनों प्राधिकरण के इंजीनियर इन चीफ यादव सिंह के खिलाफ सीबीआई ने अंडर ग्राउंड केबलिंग की जांच शुरू की। उस समय नोएडा स्टेडियम प्रकरण की एफआईआर को इसी के साथ क्लब कर दिया गया। क्रिकेट स्टेडियम जांच के प्रथम चरण की कार्रवाई में टेंडर जारी करने में भारी अनियमितताएं मिली थी। इसमें नोएडा प्राधिकरण में उस समय तैनात नौ लोगों की सीधी संलिप्ता सामने आई। सीबीआई ने अपने पत्र में सभी के नामों को उनके पदनाम के जरिए स्पष्ट किया है।

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