बिलासपुर : वैकल्पिक व्यवस्था बंद, बिना डाक्टर के संचालित किया जा रहा अस्पताल

बिलासपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डाक्टर व महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी कोविड में लगाई जाने के कारण सोमवार से अस्पताल को वार्ड ब्वाय दिनेश कुमार को बैठा दिया गया। बिना डाक्टर व दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण कैसे मरीजों का भला होगा।

Neel RajputThu, 10 Jun 2021 01:08 PM (IST)
पीएचसी से मरीजों का मोहभंग निजी अस्पताल के शरण

बिलासपुर [घनश्याम पाल]। बिलासपुर नगर पंचायत क्षेत्र की पच्चीस हजार आबादी सहित आसपास के 36 गांवों की भी स्वास्थ्य देखभाल की जिम्मेदारी बिलासपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की है। इसके अंतर्गत छह उपकेंद्र कनारसी, धनौरी, दादूपुर, नवादा, बिलासपुर आते हैं। सभी को बंद कर कोविड ड्यूटी में लगा दिया गया है। जिस कारण बिलासपुर नगर व 36 गांव के ग्रामीण कोरोना महामारी व खांसी जुकाम बुखार से बचने के लिए क्षेत्रीय समाजसेवी, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों से बचाव की गुहार लगा रहे थे। जिसको संज्ञान में लेते हुए क्षेत्रीय विधायक ठा. धीरेंद्र सिंह द्वारा पंद्रह दिनों के लिए डाक्टरों की टीम व दवाएं मुहैया कराई गई थी। जो बीते शनिवार को चले गए। सोमवार से फिर वार्ड ब्वाय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बिलासपुर की बागडोर अकेले संभालने को मजबूर हो रहा है।

बुधवार को बिलासपुर देहात के गांव ईसेपुर निवासी ओंकार भाटी के नेतृत्व में बिलासपुर पीएचसी पर डाक्टर व फार्मासिस्ट मांग प्रमुखता से उठाई जा रही है। बिलासपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात डाक्टर व महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों की ड्यूटी कोविड में लगाई जाने के कारण सोमवार से अस्पताल को वार्ड ब्वाय दिनेश कुमार को बैठा दिया गया। बिना डाक्टर व दवाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण कैसे मरीजों का भला होगा। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। पहले भी बिना डाक्टर के महीनों संचालित किया जाता रहा है। बिलासपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फिर उसी राह पर संचालित किया जा रहा है। जिससे क्षेत्रीय मरीजों में रोष व्याप्त है।

क्या कहते हैं मरीज

कस्बे से चलकर आने पर दो चार गोली थमा दी जाती है। जिससे आराम नहीं होने पर निजी अस्पताल पर जाना पड़ता है।

- खलीक मरीज

यहां पर महिला डाक्टर आई थी। कुछ दिनों के बाद अब यहां नहीं आती है।

-समीदा मरीज

महिला डा. को यहां से हटा दिया गया है। जिससे महिलाएं यहां आना पसंद नहीं कर रही है।

-समा मरीज

सरकारी अस्पताल बिना डाक्टर के ही चलाया जा रहा है। दवाएं भी खाने में डर नहीं लगता है कहीं अन्य परेशानी उत्पन्न न हो जाए।

- मजहबी मरीज

इस अस्पताल पर पर्चा बनाने पट्टी बांधने से लेकर दवा देने तक का काम एक कर्मचारी करता है। दवाओं पर विश्वास करना मुश्किल है।

-मेहरचंद मरीज

विभाग के उच्चाधिकारी के आदेशानुसार पीएचसी खोलकर नार्मल दवाएं दे रहे हैं। ज्यादा परेशानी बताने वाले मरीजों को दनकौर व कासना अस्पताल जाने की सलाह दी जाती है।

-दिनेश कुमार, वार्ड ब्वाय पीएचसी बिलासपुर

कोविड जांच व टीकाकरण के कारण डाक्टर व अन्य स्टाफ की गांवों में ड्यूटी लगी हुई है। जल्द पीएचसी पर तैनात करने का प्रयास किया जा रहा है।

-डा. नरेंद्र तिवारी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी पीएचसी दनकौर

लगातार पीएचसी पर डाक्टर व फार्मासिस्ट तैनाती मांग की अनदेखी की जा रही है। वार्ड ब्वाय से पीएचसी संचालित कराई जा रही है। लोगों को समुचित इलाज नहीं मिल रहा है। हादसा होने की आशंका बनी हुई है।

-ओंकार भाटी, मेरठ मंडल संयोजक विश्व हिंदू महासंघ उत्तर प्रदेश

जल्द स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन के अधिकारियों से वार्ता कर स्थाई तौर पर डाक्टर व फार्मासिस्ट की तैनाती कराने का प्रयास किया जा रहा है।

- सोनू वर्मा, सांसद प्रतिनिधि दनकौर

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